10 सितंबर 2026 को अमावस्या पर कोई ग्रहण नहीं लगेगा
श्राद्ध और पितृ तर्पण के लिए शुभ दिन, 2027 में दो सूर्य ग्रहण होंगे
10 सितंबर 2026 को भाद्रपद महीने की अमावस्या है, जिसमें पितृ तर्पण, श्राद्ध और दान जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दिन कोई सूर्य या चंद्र ग्रहण नहीं लगेगा, जिससे पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्य बिना किसी बाधा के हो सकेंगे।
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10 सितंबर 2026 को भाद्रपद महीने की अमावस्या है, जिसे पिठोरी या पोला अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध और दान जैसे धार्मिक अनुष्ठान करने का विशेष महत्व होता है। इस बार अमावस्या पर कोई सूर्य या चंद्र ग्रहण नहीं लगेगा, जिससे श्रद्धालु बिना किसी व्यवधान के कर्मकांड कर सकेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पितृ दोष से मुक्ति पाने का खास अवसर होती है। ग्रहण लगने पर शुभ कार्यों पर रोक लगती है क्योंकि उस समय सूर्य का शुभ प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए पूजा-पाठ, शादी-ब्याह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य ग्रहण के दौरान नहीं किए जाते।
2027 में पहला सूर्य ग्रहण 6 फरवरी को और दूसरा 2 अगस्त को लगेगा। धार्मिक दृष्टि से ग्रहण को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान शुभ कार्य टाल दिए जाते हैं। इस बार अमावस्या पर ग्रहण न लगने से सभी धार्मिक क्रियाएं बिना बाधा पूरी होंगी।
यह जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ग्रहण का धार्मिक कार्यों पर क्या प्रभाव होता है?
- ग्रहण के दौरान सूर्य का शुभ प्रभाव कम हो जाता है, इसलिए पूजा, शादी और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य टाल दिए जाते हैं।
- 10 सितंबर 2026 की अमावस्या का विशेष महत्व क्या है?
- इस बार अमावस्या पर ग्रहण नहीं लगने से सभी धार्मिक क्रियाएं बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकेंगी।
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