हस्तिनापुर में रोडरेज विवाद में नितिन की हत्या, मंत्री ने मांगा इंसाफ
दो दिन पहले विवाद के बाद भी तनाव बना रहा, पुलिस ने चार टीमें लगाई
हस्तिनापुर में रोडरेज विवाद के बाद नितिन की हत्या हो गई, जिसके लिए पुलिस ने चार टीमें गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने न्याय की मांग की है और पुलिस ने फॉरेंसिक जांच भी शुरू की है। पुलिस के अनुसार हत्या दो दिन पहले हुए विवाद का परिणाम है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ था।
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हस्तिनापुर में रोडरेज विवाद के बाद नितिन नागर की हत्या हो गई। राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने घटना के बाद पुलिस से न्याय की मांग की। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें लगाई हैं और फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है।
दो दिन पहले प्रिंस और मिट्ठू के बीच रास्ते को लेकर विवाद हुआ था, जिसे पुलिस की मौजूदगी में समझौते से सुलझाया गया था। परिवार का कहना है कि इसके बाद भी दोनों पक्षों में तनाव बना रहा।
नितिन शुक्रवार शाम अपने दोस्त प्रिंस के साथ मध्य गंगनहर किनारे दौड़ लगाने गया था। प्रिंस बाइक चला रहा था और नितिन पीछे बैठा था। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के पास करीब छह युवकों ने उन्हें घेर लिया।
पुलिस ने बताया कि हत्या की वजह दो दिन पुराना रोडरेज विवाद है। घटना के बाद एसपी देहात अभिजीत कुमार और सीओ पंकज लवानिया फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे। पुलिस ने हस्तिनापुर, गंगानगर, इंचौली, मवाना और नौचंदी थाने की पुलिस को भी लगाया है।
परिवार के अनुसार नितिन दिल्ली पुलिस की परीक्षा पास कर चुका था और तीन अक्टूबर को फिजिकल टेस्ट की तैयारी कर रहा था। छह महीने पहले उसकी शादी हस्तिनापुर निवासी प्रिया से हुई थी।
नितिन रोजाना प्रिंस के साथ सुबह-शाम दौड़ लगाता था। बेटे की मौत की खबर सुनते ही पिता सतीश की हालत बिगड़ गई, जिन्हें देर रात एप्सनोवा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। परिवार का कहना है कि दो दिन पहले विवाद को गंभीरता से लिया जाता तो नितिन की जान बच सकती थी। उस समय दोनों पक्षों को थाने लाया गया था और समझौते के बाद बिना कार्रवाई के छोड़ दिया गया था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हत्या के समय नितिन कहां था?
- नितिन शुक्रवार शाम अपने दोस्त प्रिंस के साथ मध्य गंगनहर किनारे दौड़ लगाने गया था।
- नितिन का परिवार क्या कहता है?
- परिवार का तर्क है कि विवाद को पहले गंभीरता से लिया जाता तो उसकी जान बच सकती थी।
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