मासिक शिवरात्रि 9 सितंबर को, भगवान कृष्ण की छठी भी उसी दिन
भाद्रपद मासिक शिवरात्रि और कृष्ण जन्म की छठी 9 सितंबर को मनाई जाएगी
इस बार मासिक शिवरात्रि 9 सितंबर को मनाई जाएगी, जो भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ती है। उसी दिन भगवान श्रीकृष्ण की जन्म के छह दिन बाद छठी भी मनाई जाएगी, जिसमें बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है और पूजा-अर्चना की जाती है। दोनों त्योहारों के लिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि निर्धारित की गई हैं।
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धर्म डेस्क। भाद्रपद माह की मासिक शिवरात्रि इस बार 9 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण की जन्म के छह दिन बाद मनाई जाने वाली छठी भी होगी। दोनों त्योहारों के लिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि भी तय की गई है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 9 सितंबर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 10 सितंबर सुबह 10 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। हालांकि, निशिता मुहूर्त के आधार पर मासिक शिवरात्रि 9 सितंबर को ही मनाई जाएगी क्योंकि उस दिन निशिता मुहूर्त अमावस्या तिथि के साथ है।
शिवरात्रि के दिन दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से भद्रा लगना शुरू होगा जो रात 11 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इस भद्रा का वास धरती पर होने के कारण इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। मासिक शिवरात्रि का निशिता पूजा मुहूर्त रात 11 बजकर 55 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 41 मिनट तक है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 31 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त उस दिन नहीं होगा।
अमृत काल दोपहर 1 बजकर 43 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 23 मिनट से 3 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इस बार मासिक शिवरात्रि पर शिव योग और सिद्ध योग बन रहे हैं। शिव योग सुबह से रात 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा, जो जप, ध्यान और पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इसके बाद रात 9 बजकर 52 मिनट से सिद्ध योग शुरू होगा, जिसमें किए गए कार्य सफल होते हैं।
शिवरात्रि के दिन अश्लेषा नक्षत्र सुबह से दोपहर 3 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, उसके बाद मघा नक्षत्र शुरू होगा।
भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव इस वर्ष 4 सितंबर, शुक्रवार को पूरे भारत में धूमधाम से मनाया गया था। हिंदू धर्म के अनुसार जन्म के छह दिन बाद उनकी छठी मनाई जाती है, जो इस बार 9 सितंबर को है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
छठी के दिन सबसे पहले गाय के देसी घी से मालिश की जाती है और कम से कम तीन बार दूध के पात्र में डुबकियां लगाई जाती हैं। इसके बाद गंगाजल से स्नान कराया जाता है और लाल या पीले रंग के नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। नजर का धागा भी पहनाना आवश्यक होता है।
भोग में छह प्रिय व्यंजन जैसे कड़ी, चावल, मख्खन, खीर-पूरी और हलवा अर्पित किए जाते हैं। अंत में 11, 21 या 51 रुपये लेकर नजर उतारने की परंपरा निभाई जाती है। इस बार छठी के दिन भद्रा, मालव्य और हंस राजयोग का संयोग भी बन रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मासिक शिवरात्रि के दिन भद्रा अवधि कब तक रहती है?
- भद्रा 9 सितंबर को दोपहर 12:30 से रात 11:29 तक रहेगी, इसलिए इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
- मासिक शिवरात्रि के शुभ मुहूर्त कौन-कौन से हैं?
- अमृत काल दोपहर 1:43 से 3:14 तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:23 से 3:13 तक तथा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:31 से 5:17 तक है।
- शिव योग और सिद्ध योग का क्या महत्व है?
- शिव योग जप, ध्यान और पूजा के लिए शुभ है, जबकि सिद्ध योग के दौरान किए गए कार्य सफल होते हैं।
- छठी के दिन नजर उतारने की परंपरा कैसी होती है?
- नजर उतारने के लिए 11, 21 या 51 रुपये लेकर परंपरा निभाई जाती है।
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