देहरादून में एमबीबीएस इंटर्न और पीजी डॉक्टर हड़ताल पर
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
देहरादून के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लगभग 600 एमबीबीएस इंटर्न और 600 पीजी डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं, जिससे अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं। पीजी डॉक्टरों ने ओपीडी, वार्ड और इलेक्टिव ओटी में काम बंद कर दिया है और इंटर्न की जगह नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ को तैनात किया गया है। सरकार को स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है और इस पर विचार चल रहा है।
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देहरादून। देहरादून के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों के करीब 600 एमबीबीएस इंटर्न सोमवार को हड़ताल पर चले गए। इसके बाद मंगलवार से लगभग 600 पीजी डॉक्टर भी कार्य बहिष्कार पर हैं। दोनों समूह स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जिससे अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
एमबीबीएस इंटर्न 17 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं। वहीं, पीजी डॉक्टरों को वर्तमान में 69 से 71 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलता है, जिन्हें वे 1.10 लाख रुपये करने की मांग कर रहे हैं। दून अस्पताल में इंटर्न की जगह नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को ओपीडी में लगाया गया है, जिससे वार्डों में पीजी डॉक्टरों और जूनियर रेजिडेंट्स पर काम का दबाव बढ़ गया है।
पीजी डॉक्टरों ने इमरजेंसी और इमरजेंसी ओटी में सेवाएं जारी रखी हैं, लेकिन ओपीडी, वार्ड और इलेक्टिव ओटी में काम नहीं कर रहे हैं। इससे ओपीडी और वार्ड की व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं और मरीजों को चिकित्सकों से परामर्श के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
पीजी डॉक्टरों ने दून अस्पताल की ओपीडी बिल्डिंग में धरना-प्रदर्शन भी किया है। उनका कहना है कि सरकार और सिस्टम की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, इसलिए कार्य बहिष्कार करना पड़ा।
पीजी डॉक्टरों का प्रस्ताव भी शासन स्तर पर विचाराधीन है। उन्होंने डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की है।
एमबीबीएस इंटर्न और पीजी डॉक्टरों के इस आंदोलन से सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। मरीजों को ओपीडी में सीधे चिकित्सकों के पास जाना पड़ रहा है, जिससे कई विभागों में भीड़ बढ़ गई है।
इंटर्न के मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है
डॉ. आशुतोष सयाना
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हड़ताल के कारण अस्पतालों की सेवाओं पर क्या असर पड़ा?
- ओपीडी और वार्ड की व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं और मरीजों को चिकित्सकों से परामर्श के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
- पीजी डॉक्टरों ने किन क्षेत्रों में काम जारी रखा है?
- पीजी डॉक्टरों ने इमरजेंसी और इमरजेंसी ओटी में सेवाएं जारी रखी हैं।
- डॉक्टरों की मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है?
- सरकार की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, लेकिन प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है।
- इंटर्न का मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव किसे भेजा गया है?
- इंटर्न के मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
- परेशानी के कारण मरीजों को क्या करना पड़ रहा है?
- मरीजों को ओपीडी में सीधे चिकित्सकों के पास जाना पड़ रहा है, जिससे कई विभागों में भीड़ बढ़ गई है।
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