घर पर बनाएं मिट्टी से ईको-फ्रेंडली गणपति, जानें आसान स्टेप्स
गणेश चतुर्थी पर मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से मूर्ति बनाकर पर्यावरण बचाएं
गणेश चतुर्थी पर पर्यावरण संरक्षण के लिए घर पर मिट्टी से ईको-फ्रेंडली गणपति की मूर्ति बनाना बेहतर विकल्प है। मिट्टी से बनी ये मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के मुकाबले पर्यावरण के लिए सुरक्षित होती हैं। मूर्ति बनाकर 1-2 दिन सुखाने के बाद हल्दी, कुमकुम और चंदन से पूजा की जाती है तथा दूर्वा अर्पित करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।
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गणेश चतुर्थी के अवसर पर घर पर ही मिट्टी से ईको-फ्रेंडली गणपति की मूर्ति बनाना एक बढ़िया विकल्प है। मिट्टी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर आप पर्यावरण के प्रति जागरूकता दिखा सकते हैं। इस त्योहार में विधि-विधान से पूजा करने और दूर्वा अर्पित करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।
गणेश चतुर्थी पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती है। इस 11 दिन के त्योहार में लोग गणपति की मूर्ति घर में स्थापित कर पूजा करते हैं और फिर मूर्ति का विरसर्जन करते हैं। बाजार में कई तरह की मूर्तियां मिलती हैं, जिनमें प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां पर्यावरण के लिए हानिकारक होती हैं क्योंकि वे पानी में घुलती नहीं। ईको-फ्रेंडली मूर्तियां महंगी होती हैं, इसलिए घर पर खुद मिट्टी से मूर्ति बनाना बेहतर विकल्प है।
मूर्ति बनाने के लिए सबसे पहले मिट्टी को अच्छी तरह छान लें ताकि उसमें कंकड़ या तिनके न रहें। फिर मिट्टी में थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर नरम आटे जैसा गूंध लें, ध्यान रखें कि मिट्टी न ज्यादा सख्त हो और न ज्यादा गीली। इसके बाद मिट्टी का एक चपटा चौकोर हिस्सा बेस के लिए बनाएं, जिस पर गणेश जी विराजेंगे। फिर मिट्टी का बड़ा गोला बनाकर उसे अंडाकार आकार दें और बेस पर रखें।
मूर्ति के पेट के निचले हिस्से पर दो पतले रोल मुड़े हुए पैर की तरह लगाएं। हाथ बनाने के लिए दो और रोल बनाएं, एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में ऊपर की ओर मोड़ा हुआ और दूसरे हाथ में मोदक रखा हुआ दिखाएं। सिर के लिए छोटा गला बनाकर धड़ के ऊपर रखें और सूंड का आकार देकर चेहरे के बीच में लगाएं। दोनों तरफ कान की तरह दो चपटी पत्तियां चिपकाएं। सिर पर छोटा मुकुट लगाएं और टूथपिक से कान, मुकुट और वस्त्रों का डिजाइन बनाएं। पेट के पास मिट्टी का छोटा चूहा और हाथ में मोदक भी बनाएं।
मूर्ति बनने के बाद इसे 1-2 दिन छांव में सुखाएं, सीधे धूप में न रखें ताकि दरारें न पड़ें। सूखने के बाद हल्दी, कुमकुम और चंदन के पेस्ट से गणेश जी के वस्त्र रंगें और माथे पर तिलक लगाएं।
वैदिक ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों में गहन अध्ययन कर रही आयुषी त्यागी के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से पूजा और दूर्वा अर्पित करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। वे ज्योतिष, वास्तु और धर्म से जुड़ी जानकारी सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाती हैं ताकि धर्म के प्रति भ्रम न फैले।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी को कैसे तैयार करें?
- मिट्टी को अच्छी तरह छानकर उसमें कंकड़ और तिनके निकालें, फिर थोड़ा पानी मिलाकर नरम आटे जैसा गूंध लें।
- मूर्ति बनाने के बाद रंग कैसे लगाएं?
- मूर्ति सूखने के बाद हल्दी, कुमकुम और चंदन के पेस्ट से वस्त्र रंगें और माथे पर तिलक लगाएं।
- गणपति मूर्ति बनाने में कौन-कौन से हिस्से शामिल होते हैं?
- पेट के नीचे मुड़े हुए पैर, दो हाथ (आशीर्वाद और मोदक लिए), सिर, सूंड, कान, मुकुट, चूहा और मोदक।
- आयुषी त्यागी कौन हैं और उनका संदेश क्या है?
- आयुषी त्यागी वैदिक ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों की शोधकर्ता हैं, जो सरल भाषा में धर्म का ज्ञान देती हैं।
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