झालावाड़ के डॉ. दिव्येंदु सेन को राष्ट्रपति से सम्मान मिला
ग्रामीण स्कूल में विज्ञान शिक्षा के लिए नवाचार और प्रेरणा का उदाहरण बने शिक्षक
झालावाड़ के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के जीव विज्ञान शिक्षक डॉ. दिव्येंदु सेन को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया और शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सम्मानित किया। डॉ. सेन ने ग्रामीण विद्यार्थियों को विज्ञान और खगोल विज्ञान से जोड़ने के लिए कई पहल की हैं और सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी के बावजूद शिक्षा को बेहतर बनाने का प्रयास किया है।
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झालावाड़। झालावाड़ जिले के पचपहाड़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के जीव विज्ञान शिक्षक डॉ. दिव्येंदु सेन को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सम्मानित किया। डॉ. सेन ने ग्रामीण विद्यार्थियों को विज्ञान, खगोल विज्ञान और तकनीक से जोड़कर शिक्षा में नई पहल की है।
डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि सरकारी स्कूल के प्रति लोगों में नकारात्मक छवि है, लेकिन उनके लिए यह संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि संभावनाओं का स्थान रहा है। उन्होंने कहा, "अगर बच्चे में सीखने की जिज्ञासा है और शिक्षक में कुछ नया करने का जज्बा है तो सीमित संसाधनों में भी बहुत कुछ किया जा सकता है।" उनका प्रयास रहा है कि सरकारी स्कूल के बच्चे भी बड़े स्कूल के बच्चों जैसे सपने देखें।
उन्होंने अपनी शिक्षा का जिक्र करते हुए बताया कि प्रारंभिक शिक्षा प्राइवेट स्कूल से हुई, लेकिन 11वीं और 12वीं उन्होंने सरकारी स्कूल से पूरी की। शिक्षक बनने के बाद अनुभव से उन्होंने जाना कि हर बच्चा अलग तरीके से सीखता है और उनकी जिज्ञासा को शांत करना जरूरी है।
डॉ. सेन ने कहा कि बच्चों को विज्ञान केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखना चाहिए। खगोल विज्ञान में उन्होंने ऐसा विकल्प खोजा, जिससे बच्चे बिना लैब के वैज्ञानिक विधि से जुड़ सकें। पहले कुछ बच्चे लैपटॉप चलाना नहीं जानते थे, लेकिन अब वे वास्तविक खगोल विज्ञान से जुड़े डेटा को पढ़ना और विश्लेषण करना सीख चुके हैं। उनका मानना है कि सही दिशा और उपकरण मिलने पर संसाधनों की कमी बच्चों की जिज्ञासा में बाधा नहीं बनती।
उन्होंने बताया कि चुनौती संसाधनों की कमी से अधिक सही दिशा और अवसर देने की थी। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों को इस मुहिम से जोड़ने के लिए शुरुआत सीमित संसाधनों से की और परिणाम दिखने पर लोगों का विश्वास बढ़ा। ग्रामीण सरकारी स्कूल के बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ रहे हैं, जिससे सहयोग बढ़ा।
डॉ. सेन ने कहा, "नेतृत्व का मतलब अकेले सब कुछ करना नहीं है, बल्कि अपनी सोच पर लोगों का विश्वास कायम करना और उन्हें यह महसूस कराना है कि यह काम उनका भी है।" उन्होंने बताया कि पेड़ों पर QR कोड लगाने का विचार अर्बन एरिया के विद्यार्थियों को पेड़ों की जानकारी न होने से आया। स्कूल परिसर के पेड़ों की पहचान कर हर पेड़ को डिजिटल फीचर में बदलने का प्रयास किया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- डॉ. सेन का सरकारी स्कूलों के प्रति क्या दृष्टिकोण है?
- वे मानते हैं कि सरकारी स्कूल संसाधनों की कमी का नहीं, बल्कि संभावनाओं का स्थान हैं।
- डॉ. दिव्येंदु सेन ने पेड़ों पर QR कोड लगाने का विचार क्यों दिया?
- यह विचार अर्बन एरिया के विद्यार्थियों में पेड़ों की जानकारी की कमी को देखते हुए आया।
- डॉ. सेन छात्रों की जिज्ञासा को कैसे बढ़ाते हैं?
- वे बच्चों को विज्ञान को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे अनुभव के जरिए समझाते हैं।
- उनके नेतृत्व की खासियत क्या है?
- डॉ. सेन का मानना है कि नेतृत्व का मतलब अपनी सोच पर लोगों का विश्वास कायम करना है।
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