हरतालिका तीज पर बालू से शिव-पार्वती की मूर्ति कैसे बनाएं
पूजा में मूर्ति निर्माण की विधि और ध्यान रखने वाली बातें जानें
हरतालिका तीज पर पूजा के लिए बालू या मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाई जाती है, जिसे पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखा जाता है। मूर्ति बनाते समय साफ बालू का उपयोग करना जरूरी है और पूजा के बाद मूर्ति का विसर्जन किसी पवित्र जल स्रोत में किया जाता है। इस परंपरा का पालन पूजा स्थल की स्वच्छता और सही विधि के साथ किया जाता है।
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हरतालिका तीज की पूजा में बालू से शिव-पार्वती की मूर्ति बनाना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इस पूजा में मूर्ति निर्माण के लिए साफ बालू या मिट्टी का चयन और उसकी शुद्धि आवश्यक होती है। पूजा के दौरान मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, हरतालिका तीज की पूजा में मिट्टी या बालू से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाना शामिल है। माना जाता है कि माता पार्वती ने भी इसी प्रकार भगवान शिव की आराधना की थी। मूर्ति बनाने के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी तैयार करें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद बालू से शिवलिंग और माता पार्वती की मूर्ति तैयार करें। चाहें तो भगवान गणेश की छोटी मूर्ति भी बना सकते हैं।
पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और बालू में कंकड़ या गंदगी हो तो उसे छानकर शुद्ध करें। कुछ लोग शुद्ध मिट्टी में दूध मिलाकर भी मूर्ति बनाते हैं। बालू को अच्छी तरह गूंथ लें ताकि वह आकार ले सके। मूर्ति बनाते समय मन को शांत रखें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा की तैयारी करें।
मूर्ति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय चौकी पर रखना बेहतर माना जाता है। पार्थिव शिवलिंग बनाते समय उसके आकार और दिशा का भी ध्यान रखा जाता है। परंपरा के अनुसार शिवलिंग के साथ अरघा बनाया जाता है और उसका जल निकास उत्तर दिशा की ओर रखा जाता है। माता पार्वती की मूर्ति शिवलिंग के पास स्थापित की जाती है। पूजा के दौरान मूर्तियों का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ होता है।
अगर मूर्ति टूट जाए या उसमें दरार पड़ जाए तो उसकी पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में पुरानी बालू को सम्मानपूर्वक अलग करके नई मूर्ति बनाई जा सकती है। मूर्ति बनाते समय जल्दबाजी न करें क्योंकि बालू का आकार आसानी से बिगड़ सकता है।
पूजा में केवल मूर्ति बनाना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पूजा करने वाले व्यक्ति का मन और भाव भी खास होते हैं। इसलिए साफ-सफाई रखें और भगवान शिव के मंत्र का जाप कर सकती हैं। पूजा की चौकी को ऐसी जगह रखें जहां गंदगी या पैर न पहुंचे।
पूजा और रात्रि जागरण पूरा होने के बाद बालू की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। अगले दिन सुबह पूजा और आरती पूरी करने के बाद मूर्ति को सम्मानपूर्वक चौकी से हटाएं और किसी पवित्र जलस्रोत में विसर्जित करें। घर पर विसर्जन करना हो तो बड़े गमले में स्वच्छ जल डालकर भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। विसर्जन के बाद भगवान शिव और माता पार्वती से परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
वैदिक ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, लाल किताब, महाभारत, रामायण, शिवपुराण और विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों पर गहन अध्ययन के साथ लेख लिखने वाली विशेषज्ञ का मानना है कि धर्म और धार्मिक ग्रंथों से जुड़ी सही और सटीक जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए ताकि भ्रम और गलत धारणाएं न फैलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मूर्ति बनाने के लिए कौन-कौन से रंग कपड़े बिछाए जाते हैं?
- मूर्ति बनाने की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाना शुभ माना जाता है।
- बालू में गंदगी होने पर क्या करें?
- अगर बालू में कंकड़ या गंदगी हो तो उसे छानकर ही मूर्ति बनानी चाहिए।
- मूर्ति का विसर्जन कैसे किया जाता है?
- पूजा के अगले दिन मूर्ति को चौकी से हटाकर किसी पवित्र जलस्रोत या घर में गमले में स्वच्छ जल डालकर विसर्जित किया जाता है।
- पूजा में मात्र मूर्ति निर्माण ही क्यों महत्वपूर्ण नहीं है?
- पूजा के दौरान व्यक्ति का मन और भाव भी बहुत जरूरी होते हैं, साथ ही मंत्र जाप कर पूजा को प्रभावी बनाया जाता है।
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