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हुती विद्रोहियों ने मोखा और मायून पर कब्जा कर लाल सागर की सुरक्षा खतरे में डाली

दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग से 12% वैश्विक व्यापार गुजरता है, अब हुती विद्रोही इसे निशाना बना सकते हैं

यमन के ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण जलमार्ग बाब-अल-मंदेब के पास स्थित मोखा और मायून द्वीप पर कब्जा कर लिया है। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार का लगभग 12% हिस्सा और भारी मात्रा में कच्चा तेल तथा प्राकृतिक गैस ले जाता है। इस घटनाक्रम से वैश्विक समुद्री यातायात और तेल आपूर्ति पर
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यमन के ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण जलमार्ग बाब-अल-मंदेब के पास मोखा और मायून द्वीप पर कब्जा कर लिया है, जिससे वैश्विक समुद्री यातायात और तेल आपूर्ति पर खतरा उत्पन्न हुआ है। सऊदी अरब ने हुती कब्जे के जवाब में हवाई हमले किए हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने यमन में तनाव बढ़ने की चेतावनी दी है।

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लाल सागर में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य का दृश्य
लाल सागर में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य का दृश्य / प्रतीकात्मक चित्र · निहारिका टाइम्स

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यमन के ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण जलमार्ग बाब-अल-मंदेब के पास स्थित मोखा और मायून द्वीप पर कब्जा कर लिया है। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार का लगभग 12% हिस्सा और भारी मात्रा में कच्चा तेल तथा प्राकृतिक गैस ले जाता है। इस घटनाक्रम से वैश्विक समुद्री यातायात और तेल आपूर्ति पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

हुती विद्रोहियों ने गुरुवार को मोखा बंदरगाह शहर पर कब्जा जमाया, जो लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से मात्र 80 किलोमीटर दूर है। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने मायून (पेरिम) द्वीप भी अपने नियंत्रण में ले लिया, जो इस समुद्री मार्ग के बीचों-बीच स्थित है।

यह जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग 12% हिस्सा और भारी मात्रा में कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। ईरान के साथ तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर लाल सागर का यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति के लिए प्रमुख जीवनरेखा बन गया था।

हुती विद्रोहियों के कब्जे से वे इस पूरे क्षेत्र की नाकेबंदी कर सकते हैं और लाल सागर से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों को निशाना बना सकते हैं। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों ने बताया कि मोखा शहर की सड़कों पर हुती विद्रोहियों के हथियारबंद काफिले देखे जा रहे हैं और बाजार पूरी तरह बंद हैं। सुरक्षा खतरों के कारण आम नागरिक और अस्पताल के डॉक्टर अदन की ओर भाग रहे हैं, जो सऊदी समर्थित यमन सरकार के नियंत्रण में है।

हुती विद्रोहियों ने पहले तैज प्रांत के अल-शाकिरा इलाके पर भी कब्जा किया था, जो यमन सरकार की सेना के लिए आपूर्ति का मुख्य रास्ता था। इस पहाड़ी इलाके से उन्हें यमन के पश्चिमी तट पर निगरानी का सामरिक लाभ मिला है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हुती अब समुद्री यातायात को बाधित करने के लिए पानी में बारूदी सुरंगे बिछा सकते हैं।

सऊदी अरब ने हुती कब्जे के जवाब में मोखा एयरपोर्ट पर हवाई हमले किए, लेकिन किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले हुती लड़ाकों ने सऊदी के जिजान, अबहा, नाजरान और खमिस मुशैत शहरों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, जिनमें 73 लोग घायल हुए। नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में जिजान के अरामको की सुविधा के ऊपर काला धुआं भी देखा गया।

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति से दो बार फोन पर बातचीत कर हुतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की मांग की, लेकिन अमेरिका फिलहाल सीधे हस्तक्षेप के बजाय सऊदी को समर्थन देने और लाल सागर के मार्ग को खुला रखने पर जोर दे रहा है।

अगस्त में सऊदी, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते के तहत किसी एक पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा, लेकिन पाकिस्तान ने फिलहाल सैन्य कार्रवाई से इनकार किया है और ईरान के साथ तनाव कम करने के लिए बातचीत पर जोर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में यमन के लिए विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने चेतावनी दी कि यह घटनाक्रम यमन में चार साल से बनी शांति के अंत का संकेत है और इसके भयानक परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने होंगे। अमेरिका और यमन सरकार ने हुती विद्रोहियों पर प्रतिबंध कड़े करने और हथियार सप्लाई रोकने की मांग की है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हुतियों के कब्जे से स्थानीय लोगों को क्या समस्याएं हो रही हैं?
मोखा की सड़कों पर हथियारबंद हुतियों के काफिले देखे जा रहे हैं और बाजार बंद हैं, जिससे नागरिक अदन की ओर पलायन कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस स्थिति पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने शांति संकट की चेतावनी दी है और अमेरिका-संयुक्त राष्ट्र ने हथियार प्रतिबंधों की मांग की है।
अमेरिका इस संकट में क्या भूमिका निभा रहा है?
अमेरिका सीधे हस्तक्षेप से बचते हुए सऊदी अरब को समर्थन दे रहा है और लाल सागर के मार्ग को खुला रखने पर जोर दे रहा है।
पाकिस्तान का इस संकट में क्या रुख है?
पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई से इनकार करता है और ईरान के साथ तनाव कम करने के लिए बातचीत की वकालत कर रहा है।

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Published12 सितंबर 2026, 11:32 IST IST
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