हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने मेडिकल बोर्ड फैसले के खिलाफ अपील की व्यवस्था मांगी
आयोग ने कहा, जिला बोर्ड के फैसले को चुनौती देने का अधिकार स्पष्ट होना चाहिए
हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने मेडिकल बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील की स्पष्ट व्यवस्था न होने पर राज्य सरकार से प्रभावी अपीलीय तंत्र बनाने की सिफारिश की है। आयोग ने जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के फैसलों के खिलाफ स्वतंत्र अपील व्यवस्था बनाने और चिकित्सा लापरवाही के मामलों के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने की जरूरत भी बताई है। अगली सुनवाई 21 जनवरी 2027 को होगी।
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हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने मेडिकल लापरवाही की शिकायतों में जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील की स्पष्ट व्यवस्था न होने पर चिंता जताई है। आयोग ने राज्य सरकार से प्रभावी अपीलीय तंत्र बनाने की सिफारिश की है और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं ने 2017 की अधिसूचना और 2018 के संशोधनों का हवाला देते हुए बताया कि जिला स्तर पर मेडिकल बोर्ड पहले से काम कर रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट में ऐसा कोई अपीलीय तंत्र नहीं है जिससे जिला बोर्ड के निष्कर्ष को उच्चतर अथवा स्वतंत्र प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी जा सके।
आयोग ने इस कमी को रेखांकित करते हुए राज्य सरकार से जिला बोर्ड के फैसलों के खिलाफ स्वतंत्र और प्रभावी अपील व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने चिकित्सा लापरवाही से जुड़े मामलों के लिए संहिताबद्ध कानूनी ढांचा तैयार करने की जरूरत भी दोहराई।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से राज्य स्तरीय अपीलीय प्राधिकरण बनाए जाने पर जताई गई समानांतर कार्यवाही की आशंका को आयोग ने खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि जिला बोर्ड की जांच मूल कार्यवाही है और राज्य स्तरीय अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील उसकी अगली कड़ी होगी, न कि समानांतर प्रक्रिया।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं को निर्देश दिया गया है कि वे इस दिशा में उठाए गए कदमों की विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट आयोग में प्रस्तुत करें। दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखना होगा।
आयोग ने मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2027 को निर्धारित की है और प्रगति रिपोर्ट कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग में दाखिल करने का आदेश दिया है।
शिकायत की जांच के लिए बोर्ड का गठन और उसके निष्कर्ष को चुनौती देने का अधिकार, दोनों अलग-अलग पहलू हैं
आयोग
केवल जिला स्तर पर व्यवस्था होने के आधार पर किसी व्यथित व्यक्ति को उपचार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता
पूर्ण पीठ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने किस बात पर चिंता जताई?
- आयोग ने जिला मेडिकल नेग्लिजेंस बोर्ड के फैसलों के खिलाफ अपील की स्पष्ट व्यवस्था न होने को गंभीर समस्या माना है।
- क्या राज्य स्तरीय अपीलीय प्राधिकरण से संबंधित कोई विवाद है?
- आयोग ने स्वास्थ्य विभाग की समानांतर कार्यवाही की आशंका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जिला बोर्ड की जांच प्राथमिक प्रक्रिया है।
- क्या चिकित्सा लापरवाही मामलों के लिए कोई कानूनी ढांचा विकसित किया जाएगा?
- आयोग की पूर्ण पीठ ने चिकित्सा लापरवाही से जुड़े मामलों के लिए संहिताबद्ध कानूनी ढांचा तैयार करने की आवश्यकता दोहराई है।
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