कासगंज में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर, कटान जारी
ढाई दर्जन से अधिक गांव जलमग्न, छह तटबंध बह गए, बचाव कार्य जारी
कासगंज में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के बराबर पहुंच गया है, जिससे कटान तेज हो गया है और कई गांव पानी में डूबे हैं। तटबंध टूटने से स्थिति बिगड़ी है और राहत टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंच चुकी हैं। जलस्तर को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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कासगंज में गंगा नदी का जलस्तर 162.40 मीटर पर पहुंच गया है जो खतरे के निशान के बराबर है। इससे नदी के किनारे कटान तेज़ हो गया है और ढाई दर्जन से अधिक गांव पानी में डूबे हुए हैं। पिछले 24 घंटे में छह तटबंध बह चुके हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।
नरौरा, हरिद्वार और बिजनौर से निरंतर पानी छोड़ा जा रहा है ताकि जलस्तर नियंत्रित किया जा सके। कटान रोकने के लिए बनाए गए दो और तटबंध गंगा में समा गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार 12 तटबंधों में से चार के बह जाने से नदी की धारा का दबाव बढ़ गया है।
स्वास्थ्य विभाग और आपदा राहत टीमें प्रभावित गांवों में पहुंची हैं। बाढ़ का पानी पहले से ही करीब एक दर्जन गांवों को घेरे हुए है और कई संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हो रहा है।
किशोल किलोनी के पास कटान वाले स्थानों पर विभागीय टीम लगातार नजर बनाए हुए है। ठोकरों और तट की स्थिति का निरीक्षण किया जा रहा है। जहां आवश्यकता है, वहां उपलब्ध संसाधनों के अनुसार बचाव कार्य कराया जा रहा है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
यदि कटान नहीं रुका तो कृषि भूमि के साथ आसपास की आबादी के लिए भी खतरा बढ़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कटान रोकने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं?
- कटान रोकने के लिए बनाए गए दो तटबंध गंगा में समा गए हैं, जिससे धारा का दबाव बढ़ गया है।
- कटान जारी रहने से किन-किन खतरों का सामना करना पड़ सकता है?
- कटान जारी रहा तो कृषि भूमि और आसपास की आबादी के लिए खतरा बढ़ सकता है।
- किस इलाक़े में विभागीय टीम निगरानी कर रही है?
- किशोल किलोनी के पास कटान वाले स्थानों पर विभागीय टीम की लगातार नजर बनी हुई है।
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