गंगा का जलस्तर 114 मीटर पार, कानपुर-फतेहपुर में बाढ़ का खतरा
कानपुर के कटरी में तीन हजार बीघा फसल जलमग्न, चार गांव पानी से घिरे
गंगा नदी का जलस्तर कानपुर और फतेहपुर में तेजी से बढ़कर 114 मीटर से ऊपर पहुंच गया है, जिससे कानपुर के कटरी क्षेत्र की तीन हजार बीघा फसल और फतेहपुर के चार गांव जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन ने बाढ़ की संभावना को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है और राहत कार्य जारी हैं।
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गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़कर बैराज पर चेतावनी बिंदु 114 मीटर को पार कर 114.20 मीटर तक पहुंच गया है। कानपुर के कटरी क्षेत्र में तीन हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई है और फतेहपुर के चार गांव पानी में डूब गए हैं। प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नजर रखी है।
सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि से कानपुर के कटरी क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। यहां लगभग तीन हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई है। कटरी के कई गांवों के रास्ते बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए हैं, जिससे ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में नाव ही आवागमन का एकमात्र साधन बन गई है।
नगर आयुक्त ने कहा कि कार्यों में कोई शिथिलता न बरती जाए। अभियंता आरके सिंह ने बताया कि पांच पंपों से लगातार जल निकासी कराई जा रही है और स्थिति पर नजर बनी है। अध्यक्ष एपी दीक्षित ने बताया कि मुख्य मार्ग डूबने से दूध, सब्जी और राशन की आपूर्ति ठप है।
फतेहपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने से चार गांव पानी से घिरे हैं। ग्रामीण मनोज कुमार ने कहा कि गांव के चारों ओर पानी भर जाने के कारण मवेशियों को बांधने के लिए सूखा स्थान नहीं बचा है। योगेंद्र पाल ने बताया कि पिछले हफ्ते जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता था, लेकिन इस बार सोमवार और मंगलवार को तेजी से बढ़ा है।
कानपुर के ब्रह्मावर्त घाट, लक्ष्मण घाट, पत्थर घाट और सीता घाट समेत प्रमुख घाटों की सीढ़ियां डूब चुकी हैं। सिंचाई विभाग द्वारा परमियापुरवा नाले का गेट बंद किए जाने और ड्रेनेज सिस्टम न होने से सिंहपुर-मैनावती मार्ग व मकड़ीखेड़ा समेत 25 बस्तियों में पिछले दस दिनों से जलभराव है।
बाढ़ के पानी के साथ मगरमच्छ आने से लोगों में दहशत है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और कई परिवार पलायन कर चुके हैं। प्रशासन ने राहत शिविर सक्रिय किए हैं और तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
एसडीएम सदर अभिनव सिंह और नायब तहसीलदार सृजन कुमार ने ग्राम प्रधान के साथ स्थलीय निरीक्षण किया और ग्रामीणों को पानी आबादी में आने पर तुरंत सूचना देने को कहा है। सुरक्षित आवागमन के लिए दो ट्रैक्टर तैनात किए गए हैं।
सरकार ने बाढ़ की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। एसडीएम वीरेन्द्र प्रताप गुप्त ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार नाव व अन्य राहत संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जलस्तर की निगरानी और अतिरिक्त नावें लगाने की मांग की है।
बैराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 114.60 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 114.27 मीटर दर्ज किया गया है। शुक्लागंज की तरफ जलस्तर चेतावनी बिंदु से नौ सेंटीमीटर पीछे 112.91 मीटर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बाढ़ के कारण लोगों की क्या परेशानी हो रही है?
- बाढ़ के पानी से रास्ते बंद होने के कारण ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है और आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
- प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
- प्रशासन ने राहत शिविर सक्रिय किए हैं, तटीय इलाके में अलर्ट जारी किया है, और सुरक्षित आवागमन के लिए ट्रैक्टर तैनात किए हैं।
- गंगा जलस्तर में वृद्धि का हाल फिलहाल कैसा रहा है?
- जलस्तर पिछले हफ्ते धीरे-धीरे बढ़ रहा था, लेकिन सोमवार और मंगलवार को तेजी से बढ़ा है।
- जलस्तर का बैराज के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में स्तर क्या है?
- बैराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 114.60 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 114.27 मीटर दर्ज किया गया है।
- बाढ़ के पानी के साथ क्या खतरा उत्पन्न हुआ है?
- बाढ़ के पानी के साथ मगरमच्छ आने से लोगों में दहशत फैल गई है।
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