देश के आठ राज्यों में अलग-अलग अंदाज में मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी
महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक इस त्योहार की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता
देश के आठ राज्यों में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को अलग-अलग परंपराओं के अनुसार मनाई जाएगी। महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और बिहार में इस त्योहार के आयोजन एवं पूजा विधियों में भिन्नता है, जिसमें सार्वजनिक पंडाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतिमाओं का विसर्जन शामिल है। त्योहार के दौरान भगवान गणेश की पूजा विभिन्न स्थानीय विधियों और त्योहारों के साथ की जाती है।
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गणेश चतुर्थी का त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार यह शुभ तिथि 14 सितंबर, सोमवार को है। देश के विभिन्न राज्यों में इसे मनाने के तरीके और परंपराएं अलग-अलग हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश का जन्म माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र के रूप में हुआ था। उन्हें विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और बुद्धि-विवेक के देवता के रूप में पूजा जाता है। महाराष्ट्र में यह त्योहार सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जहां मुंबई के लालबागचा राजा और विशाल पंडालों में सजी गणेश प्रतिमाएं मुख्य आकर्षण होती हैं। लालबागचा राजा को 'नवसाचा गणपति' कहा जाता है, जिनके दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों भक्त आते हैं। इस उत्सव में नारियल और गुड़ से बने उकडीचे मोदक का विशेष महत्व है।
गोवा में इस त्योहार को 'चवथ' कहा जाता है और यहां मिट्टी की गणेश मूर्तियों को नदी की मिट्टी से बनाया जाता है। स्थानीय लोग प्राकृतिक चीजों, फलों और सब्जियों से 'माटोली' सजाते हैं, जो प्रकृति के प्रति प्रेम दर्शाता है। उत्सव के दौरान माता गौरी और भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। पहला दिन 'ताय' माता गौरी को समर्पित होता है और उत्सव डेढ़ से नौ दिनों तक चलता है। कुछ गांवों में सातवें दिन सजी हुई नावों की झांकी निकाली जाती है।
कर्नाटक में गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले गौरी हब्बु की पूजा होती है। दूसरे दिन बेंगलुरु और हुबली जैसे शहरों में सार्वजनिक पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और महागणपति की पूजा होती है। नियमों के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिनों के बाद गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इस पर्व को 'विनायक चविथि' कहा जाता है। यहां मिट्टी या हल्दी से बनी गणेश की छोटी प्रतिमाएं घरों में स्थापित की जाती हैं। चित्तूर जिले के वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर में 21 दिनों तक वार्षिक ब्रह्मोत्सव मनाया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। हैदराबाद के खैरताबाद गणेश की विशाल मूर्ति और हुसैन सागर झील में भव्य विसर्जन जुलूस आकर्षण का केंद्र होता है।
गुजरात के अहमदाबाद, सूरत और बड़ौदा में भव्य पंडाल सजाए जाते हैं, जहां शाम को आरती के बाद पारंपरिक गरबा और डांडिया रास का आयोजन होता है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी, लखनऊ और कानपुर में भी भव्य गणेश पंडाल सजाए जाते हैं। वाराणसी में गंगा घाटों पर बप्पा की महाआरती होती है और गंगा में प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
तमिलनाडु में गणेश चतुर्थी को 'विनायक चतुरथाई' या 'पिल्लैयार चतुरथाई' कहा जाता है। यहां भगवान गणेश को 'पिल्लैयार' कहा जाता है और वे एक ब्रह्मचारी देवता के रूप में पूजे जाते हैं। इस त्योहार का खास पकवान कोझुकट्टई है, जो मोदक का तमिल रूप है।
बिहार में गणेश चतुर्थी के दिन चौरचन पर्व मनाया जाता है। महिलाएं संतान की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और आंगन में सुंदर अरिपन बनाकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गणेश चतुर्थी का महत्व क्या है?
- यह त्योहार भगवान गणेश के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माने जाते हैं।
- महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी कैसे मनाई जाती है?
- यहां सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है जहां पंडालों में बड़ी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और विशेष मोदक बनाया जाता है।
- गोवा में 'चवथ' उत्सव की क्या खासियत है?
- मिट्टी से बनी मूर्तियों और प्राकृतिक माटोली सजावट के साथ माता गौरी और भगवान शिव की पूजा भी की जाती है।
- तेलंगाना के खैरताबाद गणेश धार्मिक कार्यक्रमों में क्या प्रसिद्ध है?
- यहां विशाल मूर्ति स्थापित की जाती है और हुसैन सागर झील में भव्य विसर्जन जुलूस होता है।
- बिहार में गणेश चतुर्थी पर कौन सा पर्व मनाया जाता है?
- यहां चौरचन पर्व मनाया जाता है जिसमें महिलाएं व्रत रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं।
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