गणेश चतुर्थी पर पूजा विधि और शुभ मुहूर्त, चंद्र दर्शन से बचें
14 सितंबर से शुरू होगा गणेश उत्सव, 25 सितंबर को होगा विसर्जन
इस बार गणेश चतुर्थी और हरितालिका तीज एक साथ पड़ रही हैं, जिसकी पूजा और मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:15 से दोपहर 1:30 तक है। गणेश चतुर्थी का व्रत रखने वाले पुरुष फलाहार कर सकते हैं, जबकि महिलाएं हरितालिका तीज पर व्रत रखती हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचना चाहिए।
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इस बार गणेश चतुर्थी और हरितालिका तीज एक साथ पड़ रही हैं। पूजा और मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11.15 से दोपहर 1.30 बजे तक है। ज्योतिषाचार्य महंत राजेश तिवारी ने बताया कि 5-6 साल में तीज के साथ चतुर्थी का ऐसा संयोग बनता है।
गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक चलेगा। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। पूजा में 21 दूर्वा, 21 लड्डू, 21 मिठाई और 21 पुष्प अर्पित किए जाते हैं। शुद्ध घी से बने 21 मोदक या लड्डू चढ़ाना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए क्योंकि मान्यता है कि इससे सालभर कलंक लगता है। इस दिन पूजा विधि में अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर और 21 दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद पुष्प चढ़ाकर धूप-दीप और नैवेद्य से पूजा करें, आरती और भजन करें।
गणेश जी की पूजा में 21 संख्या का विशेष महत्व है। जिन घरों में गणेश जी की प्रतिमा नहीं है, वे नई प्रतिमा लाकर स्थापित कर सकते हैं। मिट्टी की प्रतिमा की स्थापना करने वाले 12 दिन उत्सव मनाकर अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन करेंगे।
इस दिन पूरे शिव परिवार की पूजा का योग बन रहा है। हरितालिका तीज भी 13 सितंबर को शुरू हो रही है, लेकिन उदया तिथि की वजह से तीज का त्योहार 14 सितंबर को मनाया जाएगा। महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि गणेश चतुर्थी का व्रत रखने वाले पुरुष फलाहार कर सकते हैं।
गणेश उत्सव का संबंध केवल धार्मिक आयोजन से नहीं है, किसान अच्छी फसल और परेशानी न आने की कामना से पूजा करते हैं। इस साल की फसल को किसानों के लिए सोने के समान बताया जा रहा है। व्यापारी वर्ग भी अच्छी खरीदारी और बिक्री की कामना से गणेश जी की पूजा करता है। देश की खुशहाली और तरक्की की प्रार्थना भी की जाती है।
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है। देवी पार्वती ने नहाने से पहले अपने शरीर के मेल से एक बच्चे का पुतला बनाया और उसमें प्राण डाले। शिव ने त्रिशूल से उसका सिर काट दिया, फिर बच्चे के शरीर पर हाथी का सिर लगाया गया। उसे गजानन नाम और प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला। देवगणों ने वरदान दिया कि तीनों लोकों में सबसे पहले उसकी पूजा होगी। गणेश अपने विघ्न-गणों की स्थापना करते हैं जो अधर्मियों के कामों में रुकावट डालेंगे।
घर में अगर गणेश जी की पीतल की प्रतिमा पहले से है, तो उसे हर साल बदलने की जरूरत नहीं है, लेकिन विशेष दिनों में पूजा और श्रृंगार किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा क्यों नहीं देखना चाहिए?
- ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा के अनुसार चंद्रमा देखने से सालभर कलंक लगता है। इसलिए इस दिन चंद्र दर्शन से बचना चाहिए।
- हरितालिका तीज कब मनाई जाती है?
- हरितालिका तीज 13 सितंबर को शुरू होती है लेकिन उदया तिथि के कारण 14 सितंबर को मनाई जाती है।
- गणेश जी की पूजा में 21 की संख्या का क्या महत्व है?
- पूजा में 21 दूर्वा, 21 मिठाई, 21 पुष्प और 21 मोदक चढ़ाने का महत्व है, जो विशेष माना जाता है।
- गणेश पूजा में कौन-कौन से पदार्थ उपयोग करें?
- पूजा में अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, दूर्वा, पुष्प, धूप-दीप और नैवेद्य का प्रयोग किया जाता है।
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