धर्म / अध्यात्म 2 MIN READ

गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को, पूजा में दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व

भगवान गणेश की पूजा विधि, भोग और स्थापना का शुभ मुहूर्त इस बार 14 सितंबर को

इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा भगवान गणेश को प्रिय है और मोदक उनकी सबसे पसंदीदा मिठाई है। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी।
AI सार

इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी, जिसमें पूजा में दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व है। श्रद्धालु गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापना और पूजा करते हैं तथा बाद में विसर्जन करते हैं। पूजा में नारियल, विभिन्न प्रकार के मोदक और फल चढ़ाए जाते हैं।

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गणेश चतुर्थी पूजा की तैयारी
गणेश चतुर्थी पूजा की तैयारी / सोशल मीडिया

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इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा भगवान गणेश को प्रिय है और मोदक उनकी सबसे पसंदीदा मिठाई है। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी।

भगवान गणेश के जन्म के उत्सव को गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने घर में गणपति बप्पा की प्रतिमा लाते हैं और शुभ मुहूर्त में विधि विधान से स्थापना करते हैं। इसके बाद गणेश जी की पूजा की जाती है और उन्हें तरह-तरह के भोग लगाए जाते हैं। भक्त गणेश जी के मंत्रों का जाप करते हुए परिवार के साथ आरती उतारते हैं। कुछ दिनों बाद गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है, जो अलग-अलग घरों में डेढ़ से सात दिन के भीतर होता है। पंडालों और मंदिरों में स्थापित मूर्ति का विसर्जन आमतौर पर अनंत चतुर्दशी के दिन होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा घास भगवान गणेश को बहुत प्रिय है। इसलिए पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व है। इसके साथ ही मोदक भगवान गणेश की सबसे पसंदीदा मिठाई है, इसलिए गणेश चतुर्थी पूजा में मोदक का विशेष स्थान है। भक्त घर पर नारियल-गुड़ के मोदक, चावल के आटे के मोदक या सात्विक मोदक बना कर चढ़ा सकते हैं। इसके अलावा बेसन, बूंदी या नारियल से बने लड्डू भी भोग के रूप में लगाए जाते हैं।

पूजा की थाली में केले, सेब, अनार, नारियल और अन्य मौसमी फल रखे जाते हैं। नारियल को शुभ माना जाता है और यह गणेश पूजा का अनिवार्य हिस्सा है। भक्त पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गणपति बप्पा की पूजा करते हैं और उनकी पसंदीदा चीजें अर्पित करते हैं।

गणेश चतुर्थी की पावन कथा के अनुसार देवी पार्वती ने स्नान करते समय अपने शरीर की मैल से एक बालक की मूर्ति बनाई थी। जब भगवान शिव ने उस बालक का सिर काट दिया, तो देवताओं ने उत्तर दिशा की ओर सोए हाथी के बच्चे का सिर लाकर उसे बालक के धड़ से जोड़ दिया। इस प्रकार बालक जीवित हो उठा और भगवान गणेश कहलाए। तब से गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?
यह भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, जो भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है।
पूजा में मोदक के अलावा कौन से भोग लगाए जाते हैं?
बेसन, बूंदी और नारियल से बने लड्डू भोग के रूप में लगाए जाते हैं।
गणेश की पूजा कब शुरू होती है?
गणपति बप्पा की प्रतिमा शुभ मुहूर्त में विधि विधान से स्थापना करके पूजा शुरू होती है।
गणपति मूर्ति विसर्जन कब होता है?
घरों में 1.5 से 7 दिन के भीतर किया जाता है जबकि पंडालों में अनंत चतुर्दशी को विसर्जित किया जाता है।
पूजा में नारियल का क्या महत्व है?
नारियल अपने शुभ होने के कारण गणेश पूजा का अनिवार्य हिस्सा है।

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Published13 सितंबर 2026, 21:21 IST IST
Last updated13 सितंबर 2026, 21:21 IST IST
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