बेंगलुरु में 5 करोड़ की नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क पकड़ा गया
एसआईटी ने 90 से अधिक अस्पतालों में नकली कैंसर दवाएं सप्लाई का खुलासा किया
बेंगलुरु में पुलिस और खाद्य व औषधि प्रशासन ने 5 करोड़ रुपये मूल्य की नकली दवाओं का नेटवर्क पकड़ा है, जो अस्पतालों को ब्रांडेड दवाओं की आधी कीमत पर सप्लाई करता था। एसआईटी ने कई छापेमारी कर मुख्य आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है, जबकि जांच अभी जारी है।
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बेंगलुरु में पुलिस और खाद्य व औषधि प्रशासन ने 5 करोड़ रुपये मूल्य की नकली दवाएं जब्त की हैं। जांच में पता चला है कि यह रैकेट अस्पतालों को ब्रांडेड दवाओं की आधी कीमत पर सप्लाई करता था। एसआईटी ने कई राज्यों में छापेमारी कर मुख्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी है।
जांच की शुरुआत 18 अगस्त को बेंगलुरु के बिदादी और दोद्देरी इलाकों में एक फार्महाउस पर छापे से हुई थी, जहां नकली दवाओं, नकली बिल, पैकेजिंग और इंजेक्शन भरने वाले उपकरण जब्त किए गए। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने एसआईटी का गठन किया। एसआईटी प्रमुख वामसी कृष्णा ने बताया कि इस नेटवर्क के पूरे विस्तार का पता लगाया जाना अभी बाकी है।
एसआईटी ने बेंगलुरु के मिनर्वा सर्कल स्थित कृपा हेल्थकेयर पर छापा मारकर भारी मात्रा में संदिग्ध नकली दवाएं, कैंसर की गोलियां और आईसीयू इंजेक्शन जब्त किए। यह गोदाम दवाओं के भंडारण और सप्लाई के लिए इस्तेमाल होता था।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स को ब्रांडेड कंपनियों की एमआरपी से लगभग 50 प्रतिशत छूट पर दवाएं मुहैया कराता था। अस्पताल और केमिस्ट अधिक मुनाफे के लालच में इन दवाओं की खरीद करते रहे।
पुलिस को शक है कि इस रैकेट में कम कीमत पर दवाएं खरीदकर उन्हें अलग-अलग नामों से रीब्रांड किया जाता था और ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। कुछ दवाओं के एक्सपायर हो जाने के बाद उन्हें नए कंटेनरों में पैक कर नकली लेबल लगाए गए थे, जो जानी-मानी फार्मास्युटिकल कंपनियों की ब्रांडिंग से मिलते-जुलते थे।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि कृपा हेल्थकेयर परिसर से मेडिकल दुकानों, अस्पतालों और क्लीनिकों में दवाएं सप्लाई की जाती थीं। इस नेटवर्क में 15 से अधिक मेडिकल प्रतिनिधि दवाओं के परिवहन और वितरण में शामिल थे, जिनकी तलाश जारी है।
पुलिस बैंक लेनदेन, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और जब्त दस्तावेजों की जांच कर रही है। मुख्य आरोपी प्रशांत फरार है, जबकि फार्मेसी के मालिक वीरेश कुमार जैन को गिरफ्तार किया गया है। वीरेश पिछले पांच वर्षों से बेंगलुरु में फर्म चला रहा था और प्रशांत के साथ मिलकर नकली दवाओं का अवैध कारोबार कर रहा था।
कर्नाटक औषधि नियंत्रण विभाग ने संदिग्ध बैच नंबरों की दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है और जब्त सैंपलों को लैब टेस्ट के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियां उन 90 से अधिक अस्पतालों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही हैं, जिन्होंने नकली दवाएं खरीदी थीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- जांच कहां से शुरू हुई थी?
- जांच की शुरुआत 18 अगस्त को बेंगलुरु के बिदादी और दोद्देरी इलाकों में एक फार्महाउस पर छापे से हुई थी।
- कृपा हेल्थकेयर पर क्या जब्त किया गया था?
- कृपा हेल्थकेयर के गोदाम से भारी मात्रा में संदिग्ध नकली दवाएं, कैंसर की गोलियां और आईसीयू इंजेक्शन जब्त किए गए थे।
- रैकेट में दवाओं की सप्लाई कैसे होती थी?
- नकली दवाएं मेडिकल दुकानों, अस्पतालों और क्लीनिकों में 15 से अधिक मेडिकल प्रतिनिधि वितरित करते थे।
- दवाओं के रीब्रांडिंग के बारे में क्या पता चला?
- एक्सपायर दवाओं को नए कंटेनरों में पैक कर नकली लेबल लगाए जाते थे जो ब्रांडेड कंपनियों से मिलते-जुलते थे।
- जांच एजेंसियां किन रिकॉर्ड्स की समीक्षा कर रही हैं?
- एजेंसियां बैंक लेनदेन, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और 90 से अधिक अस्पतालों के नकली दवाओं के खरीदने के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
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