भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर और ऑटो की बिक्री बढ़ी
वित्त वर्ष 2025-26 में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मांग में तेज़ी
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 24.5 लाख रही, जिसमें इलेक्ट्रिक स्कूटर और ऑटो का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बढ़ती मांग पेट्रोल बचत और रखरखाव में सस्ते होने के कारण बढ़ी है, जबकि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं।
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वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री करीब 24.5 लाख रही, जो पिछले साल से 25 फीसदी अधिक है। इस बढ़ोतरी में इलेक्ट्रिक स्कूटर और ऑटो का बड़ा हिस्सा है, जो रोज़ाना इस्तेमाल और कम खर्च के कारण लोकप्रिय हो रहे हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन की चर्चा होते ही कारों का ख्याल आता है, लेकिन असल में बाजार की रफ्तार स्कूटर और ऑटो से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 14 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बिके, जो कुल इलेक्ट्रिक वाहनों का 57 फीसदी हिस्सा है। यात्री इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी भी लगभग 29 फीसदी रही।
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के पक्ष में रोज़ाना पेट्रोल खर्च न होने और कम रखरखाव की वजह से बचत है। शहरों में दफ्तर जाने वाले और डिलीवरी करने वाले इसे पसंद कर रहे हैं। इस बाजार में टीवीएस मोटर, बजाज ऑटो, एथर एनर्जी और ओला इलेक्ट्रिक जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का उपयोग यात्री ढोने के अलावा ऑनलाइन डिलीवरी, माल ढुलाई और छोटे कारोबार में बढ़ रहा है। रोज़ाना ज्यादा दूरी तय करने वाले ये वाहन पेट्रोल बचत के कारण आर्थिक रूप से फायदेमंद हैं।
इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री भी बढ़ रही है, लेकिन कीमत, चार्जिंग स्टेशन की कमी और बैटरी की चिंता के कारण इसकी रफ्तार धीमी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमान के अनुसार 2030 तक नई कारों में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 15 फीसदी तक पहुंच सकती है।
निवेश का अवसर केवल वाहन कंपनियों तक सीमित नहीं है। बैटरी रिसाइक्लिंग, चार्जिंग नेटवर्क, सॉफ्टवेयर, फाइनेंस और बेड़े प्रबंधन में भी बड़े मौके हैं।
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने से चार्जिंग की जरूरत भी बढ़ेगी। दिसंबर 2024 तक 25,202 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन थे। पीएम ई-ड्राइव योजना में सार्वजनिक चार्जिंग के लिए ₹2,000 करोड़ रखे गए हैं। सरकार ने शहरों में हर किलोमीटर क्षेत्र में चार्जिंग स्टेशन और राजमार्गों पर हर 20 किलोमीटर पर सुविधा का सुझाव दिया है। भारी वाहनों के लिए हर 100 किलोमीटर पर तेज चार्जिंग जरूरी है।
इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत में बैटरी का बड़ा हिस्सा होता है। भारत में बैटरी सेल उत्पादन बढ़ाने के लिए ₹18,100 करोड़ का प्रावधान है, जिससे 50 गीगावॉट घंटे की उत्पादन क्षमता तैयार होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- इलेक्ट्रिक स्कूटर और ऑटो की लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है?
- रोज़ाना पेट्रोल खर्च न होने और कम रखरखाव की वजह से बचत होती है, जिससे शहरों में ऑफिस जाने वाले और डिलीवरी करने वाले इन्हें पसंद कर रहे हैं।
- इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का उपयोग किन क्षेत्रों में बढ़ा है?
- यह ऑनलाइन डिलीवरी, माल ढुलाई और छोटे कारोबार में बढ़ रहा है, खासकर रोज़ाना ज्यादा दूरी तय करने वाले उपयोगकर्ताओं के बीच।
- इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री धीमी क्यों है?
- कीमत, चार्जिंग स्टेशन की कमी और बैटरी सुरक्षा की चिंताएं इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं।
- भारत में चार्जिंग नेटवर्क की स्थिति क्या है?
- सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सार्वजनिक चार्जिंग के लिए ₹2,000 करोड़ आवंटित किए हैं तथा विभिन्न स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने का सुझाव दिया है।
- बैटरी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
- भारत में ₹18,100 करोड़ का प्रावधान कर 50 गीगावॉट घंटे की बैटरी उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजना बनाई गई है।
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