समस्तीपुर के चापर गांव में आठ फीट तक बाढ़ का पानी
गांव में पानी बढ़ने से पीने और खाने का संकट, सरकारी नाव का इंतजार जारी
समस्तीपुर के चापर गांव में गंगा नदी की बाढ़ से छह से आठ फीट तक पानी भर गया है, जिससे लगभग तीन हजार लोग प्रभावित हुए हैं और कई घरों में दो से तीन फीट पानी घुस गया है। प्रशासन की ओर से अभी तक नाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके कारण ग्रामीण निजी नावों के सहारे सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
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समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड के चापर गांव में गंगा नदी की बाढ़ से छह से आठ फीट तक पानी भर गया है। कई घरों में दो से तीन फीट पानी घुस चुका है, जिससे ग्रामीण छतों पर रहने को मजबूर हैं और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
गांव की सड़कों पर आठ फीट से अधिक पानी जमा है, जिससे रहने की स्थिति खतरे में है। शीला देवी ने बताया, "गांव की सड़कों पर आठ फीट से अधिक पानी है" और "जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है, उसे देखते हुए गांव में रहना खतरे से खाली नहीं है"। कई परिवार छत वाले मकानों की छत पर खाना बना रहे हैं, जैसा कि रागिनी देवी ने कहा।
पानी के बढ़ने से चापाकल डूब चुके हैं और जो बचे हैं, उनमें से भी साफ पानी की जगह कचरा निकल रहा है। सोगारथ राय ने बताया, "पानी काफी बढ़ गया है और चापाकल भी डूब चुके हैं"। इससे पीने के पानी का संकट गहरा गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि अभी तक सरकारी नाव का परिचालन शुरू नहीं हुआ है। उमेश कुमार ने कहा, "गांव के लोगों के लिए अभी तक सरकारी नाव का परिचालन शुरू नहीं किया गया है"। निजी नावों के सहारे ही लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। शिवशंकर राय ने बताया कि "पिछले चार दिनों से गांव की स्थिति लगातार बिगड़ रही है"।
गांव के निचले इलाकों में पानी छह से आठ फीट तक भरा है, कई घरों में दो से तीन फीट पानी घुस चुका है। घरों में पानी के कारण चूल्हा, अनाज और जलावन डूब गए हैं। ग्रामीण मजबूरी में पानी उबालकर पी रहे हैं।
गांव के करीब तीन हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। खेत-खलिहान पहले ही पानी में डूब चुके हैं और अब घरों में भी पानी प्रवेश कर गया है। पशुओं के लिए चारा संकट भी गहरा गया है। गंगा नदी के उफान से आसपास के कई पंचायतों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है।
ग्रामीणों ने बैलगाड़ी के ट्यूब में हवा भरकर तख्ता और बांस बांधकर नाव का रूप दिया है, जिससे डुमरी से खाने-पीने का सामान गांव तक पहुंचाया जा रहा है। पानी के बीच चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। गंगा के पानी का उपयोग बर्तन धोने में किया जा रहा है।
प्रशासन को तत्काल गांव में नाव की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बाढ़ से प्रभावित लोगों की स्थिति क्या है?
- ग्रामीण छतों पर रहने को मजबूर हैं और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
- स्वच्छ पानी की उपलब्धता कैसी है?
- चापाकल डूब चुके हैं और बचा हुआ पानी कचरे से प्रदूषित हो गया है।
- ग्रामीण बाढ़ में खाने-पीने का सामान कैसे मंगा रहे हैं?
- ग्रामीण बैलगाड़ी के ट्यूब में हवा भरकर तख्ता और बांस से नाव बना कर सामान पहुंचा रहे हैं।
- सरकार की ओर से क्या कार्रवाई हुई है?
- अभी तक प्रशासन ने नाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है।
- जल प्रवाह की वजह से क्या नुकसान हुआ है?
- खेत-खलिहान डूब चुके हैं और घरों में चूल्हा, अनाज और जलावन डूब गए हैं।
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