ओडिशा में पांच ओरंगुटान शावकों की 5 करोड़ रुपये में डील का खुलासा
काली थार और सीसीटीवी फुटेज से वन्यजीव तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज
ओडिशा के बालेश्वर में पांच ओरंगुटान शावकों की तस्करी का खुलासा हुआ है, जिनकी कीमत 5 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच में दीघा के एक होटल और काली थार से जुड़े संदिग्धों की पहचान हुई है, तथा एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो मामले की जांच कर रहे हैं। पांचों ओरंगुटान शावकों को नंदनकानन चिड़ियाघर में रखा गया है और इंडोनेशियाई पक्ष उन्हें वापस लेने की मांग कर रहा है।
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ओडिशा के बालेश्वर में मिले पांच दुर्लभ ओरंगुटान शावकों की तस्करी का मामला अब तक 5 करोड़ रुपये के सौदे तक पहुंच गया है। जांच में दीघा के एक होटल और काली थार की भूमिका सामने आई है, जिससे वन्यजीव तस्करी के संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की पड़ताल तेज हो गई है।
8 सितंबर को बालेश्वर के भोगराई क्षेत्र में पांच ओरंगुटान शावक पाए गए थे, जो भारत के मूल वन्यजीव नहीं हैं। उनका प्राकृतिक आवास बोर्नियो और सुमात्रा के वर्षावन हैं, इसलिए ओडिशा के जंगल में उनका मिलना तस्करी या अवैध कैद से जुड़ा बड़ा सवाल है।
पांचों शावकों को नंदनकानन चिड़ियाघर लाया गया है, जहां तीन समर्पित केयरटेकर तीन शिफ्टों में उनकी देखभाल कर रहे हैं। हर दो घंटे में भोजन दिया जा रहा है और संक्रमण रोकने के लिए कड़े बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू हैं। ताजा जानकारी के अनुसार उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है।
जांच में दीघा के एक होटल में कथित एक करोड़ रुपये के सौदे का सुराग मिला है। ओडिशा पुलिस की एसटीएफ ने वहां से तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। होटल रजिस्टर में छह संदिग्धों के ठहरने की जानकारी मिली है, जिनमें से तीन की पहचान दर्ज थी और तीन की पहचान संदिग्ध बताई जा रही है।
हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति का काली थार से संबंध बताया जा रहा है, जिसकी गतिविधियां जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। स्थानीय सीसीटीवी फुटेज में 8 सितंबर की रात करीब 10:56 बजे काली थार के पीछे एक सफेद कार दिखाई दी। इसके बाद रात 11:35 बजे थार के भोगराई जंगल क्षेत्र के पास पहुंचने और वापस लौटने की तस्वीरें मिली हैं, जो जांच के लिए अहम सुराग हैं।
जांच एजेंसियां बंगाली पिता-पुत्र की जोड़ी की तलाश में हैं, जो कथित तौर पर कोलकाता और हावड़ा के ठिकानों पर हो सकते हैं। एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि ओरंगुटान भारत में कहां से आए, किस रास्ते से ओडिशा पहुंचे, उन्हें किसने परिवहन किया और उनका अंतिम गंतव्य क्या था।
समुद्री मार्ग की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है, और भारतीय तटरक्षक बल से सहयोग लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ओडिशा को विदेशी वन्यजीवों की तस्करी का ट्रांजिट रूट नहीं बनने दिया जाएगा। केंद्र, डब्लूसीसीबी और अन्य एजेंसियों के समन्वय से व्यापक जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि पूर्वोत्तर में कार्रवाई बढ़ने के बाद तस्कर वैकल्पिक मार्ग तलाश रहे हो सकते हैं। बांग्लादेश-पश्चिम बंगाल-ओडिशा कॉरिडोर की संभावना भी जांच के दायरे में है।
केंद्र के चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति के बाद तय होगा कि पांचों ओरंगुटान शावकों को नंदनकानन में रखा जाएगा या इंडोनेशिया भेजा जाएगा। इंडोनेशियाई पक्ष ने उन्हें वापस भेजने की मांग की है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ओरंगुटान शावकों का प्राकृतिक आवास कहां है?
- ओरंगुटान का प्राकृतिक आवास बोर्नियो और सुमात्रा के वर्षावन हैं।
- नंदनकानन चिड़ियाघर में ओरंगुटान शावकों की देखभाल कैसे हो रही है?
- तीन समर्पित केयरटेकर हर दो घंटे में भोजन देते हैं और कड़े बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल चलते हैं।
- ओडिशा पुलिस किस तरह की जांच कर रही है?
- एसटीएफ और अन्य एजेंसियां अंतरराज्यीय नेटवर्क, तस्करी मार्ग और नौजवानों की गतिविधियों की जांच कर रही हैं।
- ओरंगुटान शावकों का भविष्य क्या हो सकता है?
- केंद्र के चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति के बाद नंदनकानन में रखे जाने या इंडोनेशिया भेजे जाने का निर्णय होगा।
- क्या समुद्री मार्ग से तस्करी की संभावना है?
- समुद्री मार्ग की संभावना पूरी तरह से खारिज नहीं की गई है और भारतीय तटरक्षक बल से सहयोग लिया जा रहा है।
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