चीन ने किर्गिस्तान में पहली रेलवे सुरंग पूरी की
चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे परियोजना में सुरंग निर्माण का महत्वपूर्ण पड़ाव पार
चीन ने किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे परियोजना के तहत किर्गिस्तान में पहली रेलवे सुरंग पूरा कर ली है, जो 209.6 मीटर लंबी और 41 मीटर गहरी है। यह परियोजना मध्य एशिया में चीन की परिवहन और व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है और इसमें स्थानीय संसाधनों का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।
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चीन ने किर्गिस्तान में रेलवे परियोजना के तहत पहली सुरंग का निर्माण पूरा कर लिया है। यह सुरंग 209.6 मीटर लंबी और 41 मीटर गहरी है, जिसे सिंगल-ट्रैक रेलवे के लिए डिजाइन किया गया है। परियोजना के कई अन्य हिस्सों में भी निर्माण तेजी से जारी है।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण ऊर्जा संकट समाप्त नहीं हो रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे एलपीजी और तेल से लदे टैंकरों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
चीन ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे कॉरिडोर का निर्माण तेज़ी से आगे बढ़ाया है। इस परियोजना में किर्गिस्तान सेक्शन में नंबर-2 नॉर्थ कोश्तोबे सुरंग को सफलतापूर्वक आर-पार कर दिया गया है, जो इस खंड की पहली पूरी हुई सुरंग है।
रेलवे कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि यह सुरंग 209.6 मीटर लंबी और 41 मीटर गहरी है। इसे सिंगल-ट्रैक रेलवे सुरंग के रूप में डिजाइन किया गया है। निर्माण टीम ने सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए इसे समय पर पूरा किया है।
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। रेलवे मार्ग को इस तरह तैयार किया गया है कि साइमैल्यु-ताश नेशनल पार्क और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से बचा जा सके। वन्यजीवों की आवाजाही और स्थानीय पशुपालकों के आवागमन के लिए कलवर्ट बनाए जा रहे हैं।
कंपनी के अनुसार, किर्गिस्तान खंड में निर्माण के लिए जरूरी प्रमुख अस्थायी सड़कें और बिजली सुविधाएं चालू हैं। अब तक 27 सुरंगों, 43 पुलों और 88 रोडबेड सेक्शन पर काम शुरू हो चुका है, साथ ही 20 स्टेशनों के लिए नींव का काम भी चल रहा है।
चीन की यह परियोजना शिनजियांग के काशगर से शुरू होकर तोरुगार्ट दर्रे के रास्ते किर्गिस्तान में प्रवेश करती है और उज्बेकिस्तान के अंदीजान तक जाती है। यह मध्य एशिया में चीन के साथ परिवहन और व्यापारिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली अहम परियोजना मानी जा रही है।
परियोजना में स्थानीय स्तर पर खरीदारी पर जोर दिया जा रहा है। अब तक 10 अरब सोम (करीब 11.4 करोड़ डॉलर) मूल्य की सामग्री और उपकरण स्थानीय स्रोतों से खरीदे गए हैं। परियोजना के लिए इस्तेमाल होने वाला पूरा ईंधन किर्गिस्तान से आता है, जबकि सीमेंट समेत प्रमुख निर्माण सामग्री का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्थानीय स्रोतों से लिया गया है।
इसके अलावा 1,700 से अधिक स्थानीय मशीनें किराये पर ली गई हैं। स्थानीय समुदायों के विकास के लिए कंपनी ने करीब 15.6 करोड़ सोम खर्च किए हैं, जिसमें गांवों की सड़कों का उन्नयन, पानी और बिजली की आपूर्ति, दूरसंचार सुविधाएं, चिकित्सा सेवाएं और शिक्षा संबंधी सहायता शामिल है।
चीन की यह परियोजना पश्चिम एशिया के देशों से तेल और गैस लाने के लिए होर्मुज या बाब अल-मंदेब जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम कर सकती है। चीन अफ्रीका से मिली सीख के बाद स्थानीय स्तर पर असंतोष न हो, इसका खास ध्यान रख रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- यह रेलवे परियोजना किन देशों को जोड़ती है?
- परियोजना शिनजियांग के काशगर से शुरू होकर किर्गिस्तान एवं उज्बेकिस्तान के अंदीजान तक जाती है।
- परियोजना निर्माण में पर्यावरण सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है?
- परियोजना मार्ग को नेशनल पार्क और संवेदनशील क्षेत्रों से बचाया गया है तथा वन्यजीवों के आवागमन के लिए कलवर्ट बनाए जा रहे हैं।
- स्थानीय समुदायों के विकास के लिए क्या सहायता प्रदान की गई है?
- गांवों की सड़कों का उन्नयन, पानी, बिजली, दूरसंचार, चिकित्सा सेवाएं और शिक्षा सहायता प्रदान की गई हैं।
- यह परियोजना चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
- यह परियोजना मध्य एशिया में चीन की परिवहन और व्यापार कनेक्टिविटी को मजबूत करती है और समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करती है।
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