बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनोज जरांगे की भूख हड़ताल पर रोक लगाने से इनकार किया
हाईकोर्ट ने कहा विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, राज्य को पाटिल को मेडिकल सहायता देने का निर्देश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल को रोकने से इनकार किया है और कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है। कोर्ट ने राज्य सरकार को पाटिल को मेडिकल सहायता देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल को रोकने से इनकार किया है। चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी की बेंच ने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है और राज्य सरकार को पाटिल को हर संभव मेडिकल सहायता मुहैया करानी चाहिए। कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई है।
हाईकोर्ट का रुख और याचिका की सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वह मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल को रोकने में सक्षम नहीं है। चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार संवैधानिक है और किसी को आंदोलन करने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने कहा कि याचिका फिलहाल केवल आशंकाओं और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है, इसलिए इस पर कोई तत्काल आदेश नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या वह स्थिति को संभालने में सक्षम है और कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए। याचिका पर नोटिस जारी कर सुनवाई आगे बढ़ाई गई है।
पाटिल के बयान और विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
मनोज जरांगे पाटिल ने हाल ही में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर 12 दिन की भूख हड़ताल पूरी की है।
पाटिल के समर्थकों ने पिछले साल भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन किए थे, जिनके कारण स्कूल बंद किए गए थे और दक्षिण मुंबई में आवाजाही सीमित हो गई थी। याचिकाकर्ता के वकील मयूर खांडेपारकर ने बताया कि पाटिल के बयान से यह आशंका है कि वे बिना अनुमति के विरोध करेंगे, लेकिन कोर्ट ने कहा कि केवल आशंकाओं के आधार पर निषेधाज्ञा नहीं दी जा सकती।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कोर्ट के निर्देश
राज्य सरकार ने पाटिल के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और उन्हें समझाने के लिए मंत्रियों और प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए भेजा है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई बिना अनुमति के विरोध करता है तो राज्य कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटेगा।
कोर्ट ने याचिका पर कहा कि विरोध प्रदर्शन कानून के अनुसार होना चाहिए और राज्य सक्षम नहीं है तो हाईकोर्ट सक्षम है। साथ ही कोर्ट ने पाटिल को हर संभव मेडिकल सहायता देने के निर्देश दिए ताकि भूख हड़ताल के कारण कोई अनहोनी न हो।
पाटिल ऐसे बयान दे रहे थे कि वे बिना अनुमति के भी मुंबई में प्रवेश करेंगे और उन्होंने अपने समर्थकों से आग्रह किया कि अगर वे मुंबई नहीं पहुंच पाते हैं तो जहां भी हो सके सड़कें जाम करें।हालांकि, बेंच ने सवाल किया कि वह केवल ऐसी आशंकाओं के आधार पर निषेधाज्ञा कैसे पारित कर सकती है।चीफ जस्टिस ने कहा
मयूर खांडेपारकर, याचिकाकर्ता के वकील
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अगली सुनवाई कब होगी और उसमें क्या मुद्दे उठाए जाएंगे?
- कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी कर सुनवाई आगे बढ़ाई है, जिसमें विरोध प्रदर्शन की अनुमति और कानून व्यवस्था से जुड़ी स्थिति पर विचार किया जाएगा।
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