मनोज जरांगे का अनशन आठवें दिन भी जारी, इलाज ठुकराया
सरकार की कार्रवाई न होने पर 12 सितंबर को मुंबई जाने की चेतावनी
मराठा आरक्षण के लिए सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे का अनशन आठवें दिन भी जारी है और उन्होंने इलाज व पानी लेने से इनकार कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से कुनबी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है, लेकिन जरांगे अपनी मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं।
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सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे का मराठा आरक्षण के लिए अनशन आठवें दिन भी जारी है। उन्होंने इलाज और पानी लेने से इनकार कर दिया है और कहा है कि उनकी मांगें पूरी नहीं होने तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
जरांगे ने बताया कि हैदराबाद गैजेट से जुड़ी प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा, "जब तक सरकार हमारी मांगों को धरातल पर लागू नहीं करती, तब तक मैं कुछ नहीं लूंगा और न ही कोई इलाज कराऊंगा।" महाराष्ट्र सरकार पर उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ग्रामीणों से किए वादे पूरे नहीं किए हैं।
गुरुवार को मंत्रियों राधाकृष्ण विखे पाटिल, उदय सामंत, एमएलसी प्रसाद लाड और विधायक मकरंद पाटिल का प्रतिनिधिमंडल जरांगे से मिला और अनशन खत्म करने की अपील की। विखे पाटिल ने कहा कि सरकार ने लगभग 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड ढूंढ लिए हैं और कुनबी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है।
जरांगे ने बताया कि वे 12 सितंबर को मुंबई जाएंगे यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई। उनकी मुख्य मांग है कि पात्र मराठाओं को कुनबी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 12 सितंबर तक सरकारी आदेश जारी किया जाए, जिससे उन्हें ओबीसी के तहत आरक्षण मिल सके।
कुछ समय पहले जरांगे पाटिल राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल की अपील पर आईवी फ्लूइड लेने के लिए सहमत हुए थे, लेकिन अब उन्होंने इसका भी इनकार कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे इलाज नहीं कराएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मनोज जरांगे की मुख्य मांग क्या है?
- उनकी मुख्य मांग है कि पात्र मराठाओं को कुनबी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 12 सितंबर तक सरकारी आदेश जारी किया जाए।
- अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो जरांगे का अगला कदम क्या होगा?
- जरांगे ने कहा है कि अगर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई तो वे 12 सितंबर को मुंबई जाएंगे।
- सरकार पर मनोज जरांगे ने क्या आरोप लगाए हैं?
- जरांगे ने कहा कि सरकार ने ग्रामीणों से किए गए वादे पूरे नहीं किए हैं।
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