बीएचयू के आयुर्वेद संकाय को यूजी-पीजी पाठ्यक्रम की मंजूरी मिली
एनसीआईएसएम ने 2026-27 सत्र के लिए बीएएमएस में 60 और पीजी में 45 सीटें स्वीकृत कीं
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बीएएमएस में 60 और पीजी के 14 विषयों में कुल 45 सीटों की मंजूरी मिली है। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग ने निरीक्षण के बाद अनुमति दी है, हालांकि काउंसिलिंग प्रक्रिया में नाम बाद में जारी होने के कारण विवाद भी उत्पन्न हुआ।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यूजी और पीजी पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति मिल गई है। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग ने बीएएमएस में 60 सीटों और पीजी के 14 विषयों में 45 सीटों को मंजूरी दी है।
एनसीआईएसएम की टीम ने 22-23 मई को हाइब्रिड माध्यम से बीएचयू के आयुर्वेद संकाय का वार्षिक निरीक्षण किया था। इसके बाद आयोग के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड ने 2 सितंबर को 175वीं बैठक में अनुमति देने का निर्णय लिया और मंगलवार को इसका औपचारिक पत्र जारी किया गया।
बीएएमएस में 60 सीटें स्वीकृत हुई हैं, जबकि पीजी के 14 विषयों में कुल 45 सीटें मिली हैं, जो ईडब्ल्यूएस को मिलाकर 57 हो जाएंगी। पीजी में सर्वाधिक 12 सीटें शल्य तंत्र में हैं।
आयुर्वेद संकाय के प्रमुख प्रो. केएन मूर्ति ने 21 अगस्त को हुई सुनवाई में संस्थान का पक्ष रखा था। संकाय ने आयोग के नियमों और कानूनों का पालन करने का शपथ पत्र भी दिया है।
एनसीआईएसएम की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि आयोग की अंतिम सूची में बीएचयू का नाम शामिल नहीं था, जिससे बीएएमएस में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग के दौरान बीएचयू का विकल्प नहीं मिल रहा था। काउंसिलिंग 31 अगस्त से पहले शुरू हो चुकी है, लेकिन कॉलेजों के नाम बाद में जारी किए गए।
छात्रों ने सवाल उठाया है कि स्वीकृति या अस्वीकृति की अंतिम सूची जारी होने के बाद काउंसिलिंग क्यों नहीं शुरू की गई। हालांकि, उन्हें अपग्रेड करने का मौका मिलेगा।
स्नातकोत्तर स्तर पर जिन विषयों के लिए अनुमति मिली है, उनमें आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत, रचना शारीर, क्रिया शारीर, द्रव्यगुण विज्ञान, रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना, रोग निदान एवं विकृति विज्ञान, स्वस्थवृत्त एवं योग, प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग, कौमारभृत्य-बाल रोग, कायचिकित्सा, कायचिकित्सा-मनोविज्ञान एवं मानस रोग, शल्य तंत्र, शालाक्य-नेत्र रोग चिकित्सा तथा शालाक्य-कर्ण, नासा एवं मुख रोग चिकित्सा शामिल हैं।
आयुर्वेद संकाय में शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति बनी है क्योंकि संकाय ने बायोमेट्रिक उपस्थिति सहित कई बिंदुओं पर आयोग के समक्ष अपनी बात रखी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पीजी पाठ्यक्रम में सबसे अधिक सीटें किस विषय में हैं?
- पीजी पाठ्यक्रम में सर्वाधिक 12 सीटें शल्य तंत्र विषय में प्रदान की गई हैं।
- बीएचयू की स्वीकृति सूची में देरी की वजह क्या थी?
- अंतिम सूची में बीएचयू का नाम नहीं होने से काउंसिलिंग शुरू होने में देरी हुई और अभ्यर्थियों को विकल्प नहीं मिल पाया।
- आयुर्वेद संकाय ने किन नियमों का पालन करने का शपथ पत्र दिया?
- संस्थान ने आयोग के नियमों और कानूनों का पूरी तरह पालन करने का शपथ पत्र प्रस्तुत किया है।
- अध्यापकों के प्रमोशन को लेकर क्या स्थिति है?
- प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर असमंजस है, क्योंकि संकाय ने बायोमेट्रिक उपस्थिति समेत कई बिंदुओं पर आयोग के समक्ष अपनी बात रखी है।
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