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बीएचयू ने गेहूं के पौधे को रोग और तनाव से बचाने वाला बैक्टीरिया खोजा

लाभकारी बैक्टीरिया पौधे की रक्षा प्रणाली को हर समय सक्रिय नहीं रखते, बल्कि जरूरत पर सक्रिय करते हैं

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने गेहूं के पौधों को रोग और प्रतिस्पर्धात्मक तनाव से बचाने वाले लाभकारी बैक्टीरिया की खोज की है। यह बैक्टीरिया पौधों की रक्षा प्रणाली को लगातार सक्रिय नहीं रखते, बल्कि रोग के हमले पर तेजी से प्रतिक्रिया करते हैं।
AI सार

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने गेहूं के पौधों को रोग और प्रतिस्पर्धात्मक तनाव से बचाने वाले बैक्टीरिया की खोज की है, जो पौधों की रक्षा प्रणाली को केवल जरूरत के वक्त सक्रिय करते हैं। यह शोध बताता है कि लाभकारी बैक्टीरिया, जैसे कि बैसिलस अमाइलोलिक्वेफेशियन्स, पौधों की वृद्धि में सुधार करते हैं और ऊर्जा की बचत करवाते हैं।

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बीएचयू के वैज्ञानिक गेहूं के पौधे पर शोध करते हुए
बीएचयू के वैज्ञानिक गेहूं के पौधे पर शोध करते हुए / सोशल मीडिया

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने गेहूं के पौधों को रोग और प्रतिस्पर्धात्मक तनाव से बचाने वाले लाभकारी बैक्टीरिया की खोज की है। यह बैक्टीरिया पौधों की रक्षा प्रणाली को लगातार सक्रिय नहीं रखते, बल्कि रोग के हमले पर तेजी से प्रतिक्रिया करते हैं।

शोध में पाया गया कि मिट्टी में पाए जाने वाले लाभकारी बैक्टीरिया, विशेषकर बैसिलस अमाइलोलिक्वेफेशियन्स, गेहूं के पौधों को रोग और आपसी प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न तनाव का सामना करने में सक्षम बनाते हैं। पहले पौधों को स्पाट ब्लाच रोग उत्पन्न करने वाले फफूंद से संक्रमित किया गया और अलग-अलग पौध घनत्व पर उगाया गया, जिससे प्रतिस्पर्धात्मक तनाव उत्पन्न हुआ। अधिक संख्या में पौधों के करीब उगने से उन्हें प्रकाश, पानी, पोषक तत्वों और स्थान के लिए अधिक प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है, जिससे उनकी वृद्धि प्रभावित होती है।

अध्ययन में यह भी पता चला कि लाभकारी बैक्टीरिया से उपचारित पौधों ने बिना उपचार वाले पौधों की तुलना में बेहतर वृद्धि दिखाई। ये बैक्टीरिया पौधे की रक्षा प्रणाली को हर समय सक्रिय नहीं रखते, बल्कि रोग के संभावित हमले के लिए पहले से तैयार कर देते हैं। जब रोगजनक हमला करता है, तो पौधा तेजी से और प्रभावी ढंग से अपनी रक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है, जिससे ऊर्जा की बचत होती है और वृद्धि बेहतर होती है।

शोध में बंडाना देवी, निधि यादव और नंदिता दुबे भी शामिल हैं। यह अध्ययन बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों और विभिन्न तनावों के बीच फसलों की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

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Published3 सितंबर 2026, 16:36 IST IST
Last updated3 सितंबर 2026, 16:36 IST IST
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