भागलपुर के 'धरती पकड़' नागरमल बाजोरिया का निधन
280 से अधिक चुनाव लड़ने वाले नागरमल बाजोरिया ने 96 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली
भागलपुर के नागरमल बाजोरिया का 3 सितंबर को पटना में निधन हो गया। वे 280 से अधिक चुनाव लड़ चुके थे और लोकतंत्र में आम आदमी की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते थे। उनका पार्थिव शरीर भागलपुर लाकर बरारी घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
एक नज़र में
- भागलपुर के नागरमल बाजोरिया का 3 सितंबर को पटना में निधन हो गया।
- उन्होंने अपने जीवन में 280 से अधिक चुनावों में भाग लिया और लोकतंत्र में आम आदमी की ताकत को महत्व दिया।
- नागरमल बाजोरिया ने सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई, खासकर पेयजल संकट में नलकूप लगवाकर।
- उनका जन्म 1930 में लाहौर में हुआ था और वे 93 वर्ष की उम्र तक सक्रिय रहे।
- उनका पार्थिव शरीर पटना से भागलपुर लाकर बरारी घाट पर अंतिम संस्कार होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नागरमल बाजोरिया का निधन कब और कहाँ हुआ?
- नागरमल बाजोरिया का निधन 3 सितंबर को पटना में हुआ।
- उन्होंने कितने चुनाव लड़े थे?
- नागरमल बाजोरिया ने अपने जीवन में 280 से अधिक चुनाव लड़े थे।
- नागरमल बाजोरिया को 'धरती पकड़' क्यों कहा जाता था?
- उन्हें पेयजल संकट में सार्वजनिक नलकूप लगवाने और जनता के सेवा में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण 'धरती पकड़' कहा जाता था।
- उनका अंतिम संस्कार कब और कहाँ होगा?
- उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को सुबह आठ बजे निज निवास से निकलकर बरारी घाट पर होगा।
- नागरमल बाजोरिया की उम्र क्या थी और उन्होंने किस वर्ष पहला चुनाव लड़ा था?
- उनकी उम्र 93 वर्ष थी और उन्होंने 1969 में पहला चुनाव भी लड़ा था।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
भारत ही नहीं। भागलपुर के एमपी द्विवेदी मार्ग निवासी नागरमल बाजोरिया, जिन्हें 'धरती पकड़' के नाम से जाना जाता था, का 3 सितंबर को पटना में निधन हो गया। वे 280 से अधिक चुनाव लड़ चुके थे और लोकतंत्र में आम आदमी की ताकत का एहसास कराने के लिए जाने जाते थे।
चुनावी जीवन और सामाजिक योगदान
नागरमल बाजोरिया ने अपने जीवनकाल में 280 से अधिक चुनावों में भाग लिया, जिनमें से तीन नामांकन तकनीकी कारणों से रद्द हुए। उन्होंने 1969 में तत्कालीन राष्ट्रपति उम्मीदवार वीवी गिरि के खिलाफ नामांकन किया था और 2019 में अपना अंतिम चुनाव लड़ा था। वे चुनाव जीतने से अधिक लोकतंत्र में भागीदारी को महत्व देते थे।
भागलपुर के मारवाड़ी समाज में व्यावसायिक दायरों से बाहर निकलकर उन्होंने राजनीतिक चेतना जगाई और युवाओं को सामाजिक व सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनका चुनाव लड़ने का अंदाज भी अनोखा था; वे नामांकन रैली में राजनेताओं की तस्वीरों वाली तख्तियां गधों के गले में डालकर निकालते थे।
उनका सामाजिक सरोकार केवल चुनाव तक सीमित नहीं था। जब शहर में पेयजल संकट गहराया, तब उन्होंने निजी खर्च से कई सार्वजनिक स्थलों पर नलकूप लगवाए और पानी पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी कारण उन्हें 'धरती पकड़' कहा जाता था।
जन्म, परिवार और अंतिम संस्कार
नागरमल बाजोरिया का जन्म वर्ष 1930 में पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। देश के विभाजन के बाद वे भागलपुर आकर बसे और यहां अपना व्यवसाय खड़ा किया। वे तीन पुत्रों सतीश कुमार, अजय कुमार और दिलीप कुमार सहित परिवार छोड़ गए हैं।
पिछले 10 से 15 दिनों से वे बीमार चल रहे थे और उनका इलाज पटना के पीएमसीएच में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर गुरुवार रात नौ बजे पटना से भागलपुर लाया गया। शुक्रवार सुबह आठ बजे निज निवास से अंतिम यात्रा निकलेगी और बरारी घाट पर उनका अंतिम संस्कार होगा।
सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में उनके निधन की खबर से शोक की लहर दौड़ गई है।
चुनावी रिकॉर्ड और पहचान
नागरमल बाजोरिया ने नगर निकाय से लेकर राष्ट्रपति पद तक चुनाव लड़े। वे 93 वर्ष की उम्र में तीन लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने का फैसला कर चुके थे। उस समय वे उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, फिर भी चुनाव प्रचार के लिए उन्होंने एक मारुति वैन खरीदी थी।
उनका मानना था कि चुनाव जीतना प्राथमिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र में आम आदमी की ताकत का एहसास कराना मुख्य उद्देश्य था। इस कारण उन्हें भागलपुर में 'धरती पकड़' के नाम से जाना जाता था। उनके परिवार का दावा है कि उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
राजनीतिक और व्यावसायी वर्ग उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहा है।
वर्ष 2005 के आसपास एक चुनाव के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया था
आलोक कुमार अग्रवाल, व्यवसायी
बाजोरिया जी ने बिहार के अलावा अन्य राज्यों और यहां तक कि पड़ोसी देश नेपाल तक अनगिनत युवक-युवतियों के निस्वार्थ भाव से वैवाहिक संबंध (रिश्ते) तय कराने में अहम भूमिका निभाई
कुंज बिहारी झुनझुनवाला
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद










Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.