चूरू में 3 साल की बच्ची के गले से बैटरी निकाली गई
खिलौने की बैटरी निगलने के चार दिन बाद बिगड़ी हालत, अस्पताल में सफल ऑपरेशन
चूरू के राजकीय उप जिला अस्पताल में तीन साल की बच्ची के गले में फंसी खिलौने की बैटरी को डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर निकाला। बच्ची की हालत बिगड़ने पर अस्पताल में जांच हुई, जहां एक्स-रे में बैटरी मिलने के बाद सफल सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने अभिभावकों से बच्चों को छोटी वस्तुओं से सावधान रखने की सलाह दी है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
चूरू। चूरू के राजकीय उप जिला अस्पताल में तीन साल की बच्ची के गले में फंसी खिलौने की बैटरी को डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर निकाला। बच्ची की हालत चार दिन तक सामान्य रहने के बाद अचानक बिगड़ी, तब उसे अस्पताल लाया गया।
ढाणी दूदगिरी निवासी तीन वर्षीय कोमल चार दिन पहले खेलते-खेलते खिलौने की बैटरी निगल गई थी। गले में दर्द होने पर परिजन बैटरी निकालने की कोशिश में असफल रहे। स्थानीय जांच के बाद बच्ची कुछ समय के लिए ठीक हुई, लेकिन बाद में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
राजकीय उप जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड प्रभारी हंसराज सारण ने गंभीर स्थिति देख डॉक्टर लोकेंद्र सिंह राठौड़ को बुलाकर बच्ची की जांच करवाई। एक्स-रे में गले के अंदर धातु जैसी वस्तु फंसी मिली। परिजनों से पूछताछ में बैटरी निगलने की जानकारी सामने आई।
डॉक्टरों ने अस्पताल प्रभारी डॉ. चंद्रभान जांगिड़ की सहमति से बच्ची को ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर तत्काल ऑपरेशन किया। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र सिंह राठौड़ ने डॉ. संदीप बिजारणिया, इमरजेंसी वार्ड प्रभारी हंसराज सारण, नर्सिंग स्टाफ रेणु पूनिया और वार्ड बॉय नदीम के सहयोग से सफलतापूर्वक बैटरी निकाली।
बैटरी गले में फंसी रहने से अंदर गहरा घाव हो चुका था। यदि समय पर निकाला नहीं जाता तो स्थिति जानलेवा हो सकती थी।
परिजन दोनों चिकित्सकों और पूरी मेडिकल टीम के आभारी हैं। डॉ. लोकेंद्र सिंह राठौड़ ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को ऐसी छोटी वस्तुओं और खिलौनों से दूर रखें जिन्हें वे निगल सकते हैं। विशेषकर बैटरी जैसी वस्तुएं शरीर के अंदर पहुंचने पर गंभीर और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती हैं।
अस्पताल पहुंचने के समय बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी.
लोकेंद्र सिंह राठौड़, डॉक्टर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बैटरी गले में फंसी कैसे पता चली?
- अस्पताल में एक्स-रे के दौरान धातु जैसी वस्तु गले में मिली।
- ऑपरेशन में कौन-कौन शामिल थे?
- ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. संदीप बिजारणिया, इमरजेंसी प्रभारी हंसराज सारण, नर्सिंग स्टाफ रेणु पूनिया और वार्ड बॉय नदीम।
- डॉक्टरों ने अभिभावकों को क्या सलाह दी?
- बच्चों को छोटी वस्तुओं और बैटरियों से दूर रखने की अपील की गई।
- बच्ची की स्थिति किस वक्त नाजुक थी?
- अस्पताल पहुंचने के समय बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद





Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.