23 मामलों में 23 फांसी की सजा, जज ने माफियाओं को चेताया
धर्मशाला की अदालत ने दहेज हत्या के आरोपी को मृत्युदंड सुनाया, जज ने कहा- डरना नहीं, मरना पसंद करूंगा
धर्मशाला की अदालत ने दहेज के मामले में पत्नी को जलाने के आरोपी नदीम को मृत्युदंड और जुर्माने की सजा सुनाई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने पिछले चार महीनों में 23 मामलों में फांसी की सजा दी और माफियाओं तथा अपराधियों के दबाव में नहीं आने की बात कही।
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धर्मशाला। धर्मशाला की अदालत ने दहेज की मांग को लेकर पत्नी को जलाने के मामले में आरोपी नदीम को मृत्युदंड की सजा सुनाई। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने पिछले चार महीनों में 11 मामलों में कुल 23 लोगों को फांसी की सजा दी है। उन्होंने माफियाओं और अपराधियों से भयभीत होने से इनकार किया।
न्यायाधीश का सख्त रुख
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि वह ‘‘माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों के दबाव में’’ नहीं आएंगे और ‘‘कायर जज कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे।’’ उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वे माफियाओं से डरने लगेंगे तो न्यायालय पर आम जनता का विश्वास खत्म हो जाएगा। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जब तक अपने सिद्धांतों का पालन कर सकते हैं, तब तक सेवा करते रहेंगे।’’
मुकदमे की सुनवाई और फैसला
नदीम ने 23 जुलाई 2018 को शाहपुर कस्बे में अपनी पत्नी शहजादी को जलाकर हत्या की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सभी 11 गवाह मुकर गए, लेकिन अदालत ने शहजादी के मृत्युपूर्व बयान के आधार पर नदीम को दोषी ठहराया। शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने बताया कि नदीम को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 504 के तहत दोषी पाया गया और एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
माफियाओं की धमकियों के बीच न्याय
न्यायाधीश दिवाकर ने बताया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के माफिया और गैंगस्टरों ने उनसे संपर्क कर धमकी दी है कि यदि वे उनके खिलाफ कार्रवाई करते हैं तो कोर्ट बदलवा देंगे या जिले से ट्रांसफर करवा देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे मेरे माता-पिता ने सिखाया है कि केवल भगवान से डरना चाहिए, अन्य किसी से नहीं।’’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘जिस दिन माफियाओं से डरने लगूंगा, इस पवित्र न्यायिक संस्था से इस्तीफा दे दूंगा।’’
यदि मैं माफियाओं, बाहुबलियों या अपराधियों से भयग्रस्त होने लगूंगा तो आम जनता का न्यायालय पर से विश्वास उठ जाएगा
रवि कुमार दिवाकर, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश
वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए ‘माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों के दबाव में’ नहीं आएंगे.
रवि कुमार दिवाकर, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाहों के मुकर जाने के बावजूद नदीम को दोषी क्यों ठहराया?
- अदालत ने शहजादी के मृत्युपूर्व बयान को प्रमाण के रूप में माना, जिसके आधार पर नदीम को दोषी पाया गया।
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