72वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स गुजरात के केवड़िया में 22 सितंबर को
पहली बार दिल्ली से बाहर होगा समारोह, कलाकारों और नेताओं में बहस छिड़ी
72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह 22 सितंबर को पहली बार दिल्ली के बजाय गुजरात के केवड़िया में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। इस कार्यक्रम में विभिन्न भाषाओं की फिल्मों और पुस्तकें सम्मानित की जाएंगी, जबकि स्थान बदलने के फैसले को लेकर कुछ राजनीतिक समूहों और फिल्म जगत में विवाद भी उठा है।
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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह इस बार पहली बार दिल्ली के बजाय गुजरात के केवड़िया में 22 सितंबर को आयोजित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में यह भव्य कार्यक्रम स्टेचू ऑफ यूनिटी के पास एकता नगर में होगा।
सरकार ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों को देश के अलग-अलग राज्यों में आयोजित करने की पहल की है ताकि सांस्कृतिक गौरव को हर कोने तक पहुंचाया जा सके। इस बार के पुरस्कार समारोह में कार्तिक आर्यन और ममूटी को संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला, जबकि यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया। 'आर्टिकल 370' को बेस्ट फीचर फिल्म का सम्मान मिला, और 'भंगार' व 'राम-नामी' को नॉन-फीचर व डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में पुरस्कार मिले।
इस समारोह में मराठी, तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, तुलु और गढ़वाली भाषाओं की फिल्मों को भी सम्मानित किया गया। संजीव श्रीवास्तव को बेस्ट फिल्म क्रिटिक और डॉ. प्रदीप केचनुरु की किताब को बेस्ट पुस्तक का पुरस्कार मिला।
सरकार की इस पहल का मकसद 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत करना है। समारोह के नए स्थान पर बदलाव को लेकर फिल्म जगत और राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है।
शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यक्रम आमतौर पर राजधानी दिल्ली में होते हैं, इसलिए गुजरात को चुने जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कलाकारों से समारोह का बहिष्कार करने की अपील की है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि समारोह को गुजरात ले जाने का फैसला मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी के महत्व को कम करने और गुजरात को बढ़ावा देने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जगह बदलनी थी तो इसे मुंबई क्यों नहीं ले जाया गया।
उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर गुजरात और देश के बाकी हिस्सों के बीच दीवार खड़ी करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, 'गुजरात क्या पाकिस्तान या बांग्लादेश में है?' उनका मानना है कि ऐसे कार्यक्रम हर राज्य में होने चाहिए।
परेश रावल ने यह भी कहा कि उन्हें अपने बेटों के काम में दिलचस्पी है, लेकिन वे नहीं चाहते कि परिवार की पहचान की वजह से उन्हें कोई खास ट्रीटमेंट मिले।
यह पहली बार है जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह राजधानी से बाहर किसी अन्य राज्य में आयोजित हो रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की नई पहल के तहत यह बड़ा कदम उठाया गया है।
आम तौर पर राष्ट्रीय कार्यक्रम देश की राजधानी में आयोजित किए जाते हैं और इसी वजह से समारोह के लिए गुजरात को चुने जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
संजय राउत, शिवसेना के राज्यसभा सांसद
गुजरात भारत का एक अहम हिस्सा है और नेशनल इवेंट्स को सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
परेश रावल, अभिनेता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह गुजरात में क्यों आयोजित हो रहा है?
- सरकार की पहल के तहत राष्ट्रीय कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित किए जा रहे हैं ताकि सांस्कृतिक गौरव को सभी इलाकों तक पहुंचाया जा सके।
- राजनीतिक गलियारों में इस आयोजन को लेकर क्या प्रतिक्रियाएं आई हैं?
- शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेताओं ने समारोह के गुजरात में होने पर सवाल उठाए और कुछ ने बहिष्कार की अपील भी की है।
- इस समारोह में किन भाषाओं की फिल्मों को सम्मानित किया गया?
- मराठी, तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, तुलु और गढ़वाली भाषाओं की फिल्मों को भी पुरस्कार मिला।
- क्या यह पहला मौका है जब यह समारोह राजधानी से बाहर आयोजित हो रहा है?
- हां, यह पहली बार है जब यह समारोह दिल्ली के बजाय किसी अन्य राज्य में हो रहा है।
- कार्यक्रम में विशेष रूप से किन कलाकारों और पुस्तकों को पुरस्कार मिला?
- संजिव श्रीवास्तव को बेस्ट फिल्म क्रिटिक का पुरस्कार और डॉ. प्रदीप केचनुरु की किताब को बेस्ट पुस्तक का पुरस्कार मिला।
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