सरकारी बैंकों में तीन दिन तक कामकाज ठप, पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग
यूएफबीयू ने 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल की, 28 से 30 सितंबर तीन दिन की हड़ताल की चेतावनी
11 सितंबर को देशभर के सरकारी बैंकों में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर हड़ताल की, जिससे बैंकिंग सेवाएं तीन दिन तक प्रभावित रहीं। सरकार द्वारा मांगों पर कोई निर्णय न लेने पर आगामी 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है। निजी बैंकों की सेवाएं इस दौरान सामान्य रहीं।
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रुड़की। 11 सितंबर को देशभर के सरकारी बैंकों में बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे, जिससे बैंकिंग सेवाएं ठप हो गईं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर यह हड़ताल की।
आगरा जिले में 12 सरकारी बैंकों की करीब 450 शाखाओं में तीन दिन तक बैंकिंग कामकाज बंद रहेगा। शुक्रवार से शुरू हुई हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और लोन संबंधी सेवाएं प्रभावित हुईं। निजी बैंक इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं और उनका कामकाज सामान्य रहा।
यूएफबीयू सात यूनियन का शीर्ष संगठन है, जो बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की कुल संख्या के 90 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने कहा कि पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना उनकी लंबे समय से लंबित मांग है, जो मार्च 2024 में भारतीय बैंक संघ के साथ हुए द्विपक्षीय समझौते में सहमति बनी थी, लेकिन सरकार की अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में 1985 से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, इसलिए बैंक कर्मचारियों की मांग न्यायोचित है। उन्होंने बताया कि सरकार और भारतीय बैंक संघ के पास अभी भी वार्ता के माध्यम से मुद्दों का समाधान करने का अवसर है, जिससे आगे की औद्योगिक कार्रवाई टाली जा सके।
रुड़की में यूएफबीयू की इकाई ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा के सामने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पांच दिवसीय कार्य सप्ताह तत्काल लागू करने की मांग की।
ग्राहकों ने बताया कि वे अपने काम के लिए बैंक से पैसे निकालने आए थे, लेकिन हड़ताल के कारण काम नहीं हो सका और उन्हें काफी परेशानी हुई।
बैंक कर्मचारियों ने पेंशन में संशोधन, महंगाई भत्ते के समान सूत्र और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प देने समेत अन्य लंबित मांगों का भी समाधान नहीं होने पर हड़ताल की।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इस हड़ताल के बाद भी मांगें नहीं मानीं तो 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की जाएगी।
बैंकिंग सेवाओं पर इस हड़ताल का असर तीन दिन तक रहेगा, क्योंकि 13 और 14 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टियां हैं। इसलिए बैंक 15 सितंबर से फिर से खुलेंगे।
डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग सामान्य रूप से चलती रहीं, लेकिन शाखाओं में शारीरिक कामकाज प्रभावित रहा।
यूएफबीयू के संयोजक प्रदीप चौहान ने कहा कि यह हड़ताल केवल काम से विरत रहने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की एकता, अधिकार और सम्मान की निर्णायक आवाज है। उन्होंने एकतरफा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि स्वीकार नहीं करने की बात कही।
सरकार द्वारा उनकी मांग पर सकारात्मक परिणाम न मिलने के कारण यह हड़ताल उन पर थोपी गई है
सी एच वेंकटचलम, ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के महासचिव
अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 28 सितंबर से तीन दिन की हड़ताल की जाएगी
साह, यूएफबीयू नेता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- यूएफबीयू कौन है और उनका प्रतिनिधित्व कितना है?
- यूएफबीयू सात यूनियन का शीर्ष संगठन है जो बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की लगभग 90 प्रतिशत संख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
- बैंक कर्मचारी इस हड़ताल को क्यों मजबूरी मानते हैं?
- सरकार की ओर से मांगों पर कोई सकारात्मक कार्रवाई न होने के कारण यह हड़ताल उन पर थोपी गई है।
- आगे की योजनाएं क्या हैं अगर मांगें पूरी नहीं होतीं?
- अगर मांगें नहीं मानी गईं तो 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की जाएगी।
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