उदयपुर में 2019 के बाद भी वोटिंग में पिछड़ापन जारी
पिछले चार चुनावों के आंकड़ों से पता चला कि शहर में मतदाता उत्साह कम है
उदयपुर में नगर निगम चुनावों में पिछले चुनावों की तुलना में वोटिंग प्रतिशत लगातार प्रदेश के औसत से कम रहा है, जहां 2019 में केवल 57.81% मतदान हुआ था। इस बार कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी मुकाबले के चलते मतदान बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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उदयपुर। उदयपुर में नगर निगम चुनाव के लिए शुक्रवार को वोटिंग होगी, लेकिन पिछले चार चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि यहां मतदाता उत्साह कम रहा है। 2019 में मात्र 57.81 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो प्रदेश के औसत से काफी नीचे है। इस बार कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर के बीच मतदान बढ़ने की उम्मीद है।
2004 से 2019 तक के चुनावों के आंकड़ों से पता चलता है कि उदयपुर में सबसे ज्यादा वोटिंग 2014 में हुई थी, जब 64 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मत डाले थे। उस समय पूरे प्रदेश में 67.90 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इसके बाद 2019 के नगर निगम चुनाव में वोटिंग घटकर 57.81 प्रतिशत रह गई, जबकि प्रदेश में कुल 71.57 प्रतिशत मतदान हुआ। इस तरह उदयपुर लगातार प्रदेश की औसत से पीछे रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार मतदाता सूची के अपडेट होने, निर्वाचन विभाग और राजनीतिक दलों की सक्रियता से इस बार मतदान बढ़ने की संभावना है। सोशल मीडिया कैंपेन ने भी मतदान को लेकर माहौल बनाया है। भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी अंतिम समय तक मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने में जुटे हैं।
2019 में प्रदेश के 49 शहरी निकायों में उदयपुर की वोटिंग 57.81 प्रतिशत थी, जबकि अजमेर के नसीराबाद पालिका क्षेत्र में 91 प्रतिशत, बारां के मांगरोल में 87.96 प्रतिशत और भरतपुर के रूपवास में 87.69 प्रतिशत मतदान हुआ था।
पार्टीवार वोटों की पड़ताल में यह भी सामने आया कि राज्य में जिसकी सरकार होती है, उसे भरपूर वोट मिलते हैं, लेकिन सरकार जाते ही पार्टी से वोटर छिटक जाते हैं। चित्तौड़गढ़, राजसमंद और बांसवाड़ा में इस बदलाव का सबसे अधिक अंतर देखा गया।
उदयपुर सहित कई इलाकों में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। पिछले चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के वोट प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन बोर्ड पर भाजपा का कब्जा रहा।
मौसम भी मतदान को प्रभावित कर सकता है। पिछले कुछ दिनों से बादल छाए हुए हैं और शुक्रवार को मौसम खुशनुमा रहने से मतदान केंद्रों पर भीड़ बढ़ने की संभावना है।
इस बार सही प्रत्याशी के चुनाव से ही अगले पांच साल तक शहर के विकास का रास्ता तय होगा। गलत चुनाव से जनता को पछताना पड़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- उदयपुर में मतदान की गिरावट के क्या कारण हैं?
- मतदाता सूची का अपडेट न होना और राजनीतिक दलों की सक्रियता कम होना मुख्य कारण हैं।
- इस बार मतदान बढ़ने की उम्मीद क्यों है?
- निर्वाचन विभाग की सक्रियता और सोशल मीडिया कैंपेन से मतदान को बढ़ावा मिला है।
- अन्य शहरी निकायों की वोटिंग उदयपुर से कैसे भिन्न है?
- अजमेर के नसीराबाद में 91 प्रतिशत, बारां के मांगरोल में 87.96 प्रतिशत और भरतपुर के रूपवास में 87.69 प्रतिशत मतदान हुआ था।
- मतदान प्रतिशत का राजनीतिक प्रभाव क्या रहा है?
- राज्य में वर्तमान सरकार वाली पार्टी को भरपूर वोट मिलते हैं, पर सरकार जाते ही वोटर छिटक जाते हैं।
- मौसम का मतदान पर क्या प्रभाव होगा?
- खुशनुमा मौसम मतदान केंद्रों पर भीड़ बढ़ाने में मदद कर सकता है।
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