नारेहड़ा में 625 साल पुराने गोगाजी मंदिर का दो दिवसीय मेला संपन्न
श्रद्धालुओं ने ढोल बजाकर हाजिरी लगाई, रक्षा सूत्र बांध मनोकामना की
कोटपूतली के नारेहड़ा में 625 साल पुराने जाहरवीर गोगाजी मंदिर में गोगा नवमी के अवसर पर दो दिवसीय मेला संपन्न हुआ। मेले में दूर-दराज के श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों के बीच गोगाजी के दर्शन किए और मंदिर में अखंड ज्योत भी जलती रही। यह मेला धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देता है।
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कोटपूतली। कोटपूतली के नारेहड़ा कस्बे में स्थित करीब 625 साल पुराने जाहरवीर गोगाजी मंदिर में दो दिवसीय मेला रविवार को समाप्त हुआ। मेले के दौरान दूर-दराज के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में भक्ति गीतों के बीच गोगाजी के दर्शन किए।
मेला गोगा नवमी के अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में रखे बड़े ढोल को बजाकर गोगाजी महाराज के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई। मंदिर और आसपास लगे दुकानों पर दिनभर भीड़ बनी रही, जहां महिलाएं, बच्चे और पुरुष खरीदारी करते नजर आए।
लोक गायक मुकेश प्रजापत और राधेश्याम राणा ने भक्ति गीत गाकर श्रद्धालुओं को भक्ति में लीन कर दिया। मेले के दौरान मंदिर को दीयों और झालरों से सजाया गया था। महिलाएं रक्षा सूत्र बांधकर प्रसाद चढ़ाकर मनोकामना करती रहीं।
मंदिर की स्थापना करीब 625 साल पहले हुई थी। मान्यता है कि साल 1395 में नाहर सिंह ने नारेहड़ा गांव बसाया था। उनकी सातवीं पीढ़ी में लक्ष्मीदास गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) गए थे, जहां से ईंट लाकर उन्होंने गांव में गोगाजी मंदिर की स्थापना की। तब से गोगा नवमी पर मेले की परंपरा चली आ रही है। मंदिर में स्थापना के समय से ही अखंड ज्योत जलती आ रही है।
यहां हिंदू-मुस्लिम समेत कई समुदायों के लोग श्रद्धा से पूजा करते हैं। मेले ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता, भाईचारे और समरसता का संदेश दिया।
नारेहड़ा में पिछले 42 सालों से जाहरवीर गोगाजी रामलीला मंच हर साल रामलीला का मंचन करता है। गोगाजी को सर्पों का देवता और गो-रक्षक माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गोगाजी मंदिर की स्थापना कैसे हुई?
- साल 1395 में नाहर सिंह ने नारेहड़ा गांव बसाया था और उनकी सातवीं पीढ़ी के लक्ष्मीदास ने हनुमानगढ़ से ईंट लाकर मंदिर की स्थापना की।
- मेला कब और क्यों मनाया जाता है?
- मेला गोगा नवमी के अवसर पर मनाया जाता है, जो गोगाजी महाराज की पूजा का विशेष दिन है।
- गोगाजी को किस रूप में पूजा जाता है?
- गोगाजी को सर्पों का देवता और गो-रक्षक माना जाता है।
- मेला में कौन-कौन सी गतिविधियां होती हैं?
- भक्त भजन, ढोल बजाना, रक्षा सूत्र बांधना, प्रसाद चढ़ाना और स्थानीय कलाकारों द्वारा भक्ति गीत प्रस्तुत किए जाते हैं।
- मेला का सामाजिक महत्व क्या है?
- यह मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, भाईचारे और समरसता का संदेश भी देता है।
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