5 सितंबर को जन्माष्टमी का निशिता काल रात 11:57 से शुरू होगा
4 सितंबर को जन्माष्टमी व्रत और पूजा का शुभ दिन, पंचांग में मुहूर्त और राहुकाल का विवरण
5 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी का निशिता काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु 4 सितंबर को एक बार भोजन करके पूरे दिन उपवास रखते हैं। इसके बाद 5 सितंबर को गोगा नवमी का पर्व मनाया जाएगा, जो लोकदेवता गोगाजी महाराज को समर्पित है।
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विक्रम संवत। 4 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और जन्माष्टमी का पावन अवसर है। इस दिन व्रत रखने वाले जातकों को एक दिन पहले केवल एक बार भोजन करना चाहिए। जन्माष्टमी का निशिता काल रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 43 मिनट (5 सितंबर) तक रहेगा।
जन्माष्टमी के दिन सुबह से ही व्रत का संकल्प लेकर पूरे दिन उपवास रखा जाता है। यह व्रत भक्ति, शांति और आत्मबल बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है। व्रत का पारण अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि के समाप्त होने के बाद किया जाता है, हालांकि कुछ श्रद्धालु इनमें से किसी एक के समाप्त होते ही व्रत खोल लेते हैं।
पंचांग के अनुसार 4 सितंबर को कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि मध्यरात्रि 12 बजकर 13 मिनट (5 सितंबर) तक रहेगी, उसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। योग हर्षण दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा, फिर वज्र योग होगा। करण कौलव मध्यरात्रि 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगा, फिर तैतिल होगा। चंद्रास्त का समय दोपहर 1:05 बजे (5 सितंबर) है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। अमृत काल रात्रि 8 बजकर 3 मिनट से 9 बजकर 33 मिनट तक है। राहुकाल प्रातः 10 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। गुलिकाल प्रातः 7 बजकर 35 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक और यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 30 मिनट से सायं 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगा।
चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे जो रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा, उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। रोहिणी नक्षत्र के जातक कलात्मक, रोमांटिक, कुशल व्यापारी, विलासी, जिद्दी, प्रभावशाली आंखों वाले, ईमानदार, सत्यवादी, बातचीत में माहिर, एकाग्र और शांत मन वाले होते हैं।
जन्माष्टमी के बाद 5 सितंबर को गोगा नवमी का पर्व मनाया जाएगा, जो लोकदेवता वीर गोगाजी महाराज को समर्पित है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में इस दिन विशेष उत्साह के साथ पूजा की जाती है। गोगाजी की पूजा कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। गोगा नवमी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को आती है और इस वर्ष 5 सितंबर को पूरे दिन रहेगी।
श्रद्धालु सुबह स्नान कर पूजा स्थल को साफ करके गोगाजी महाराज का चित्र या प्रतीक स्थापित करते हैं। जिन क्षेत्रों में गोगाजी की थान होती है, वहां भी पूजा की जाती है। गोगाजी को राजस्थान के प्रमुख लोकदेवताओं में गिना जाता है और उन्हें सर्पदंश से रक्षा करने वाला माना जाता है। हालांकि, सांप के काटने पर चिकित्सकीय उपचार आवश्यक है।
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