उटंगन नदी में उफान से टोडा पुल डूबा, 50 गांव का रास्ता बंद
चंबल नदी से छोड़े पानी के कारण फतेहाबाद और बाह तहसील के कई गांव प्रभावित
उटंगन नदी में उफान के कारण टोडा पुल डूब गया है जिससे फतेहाबाद और बाह तहसील के लगभग 50 गांवों का संपर्क टूट गया है। पानी में डूबे पुल के कारण ग्रामीणों को करीब 30 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, साथ ही किसानों की फसल भी प्रभावित हुई है। प्रशासन ने नदी के जलस्तर पर निगरानी बढ़ाई है और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई करने की बात कही है।
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संवाद सूत्र। उटंगन नदी में अचानक आए उफान से टोडा पुल पानी में डूब गया है। इससे फतेहाबाद और बाह तहसील के करीब 50 गांवों का सीधा संपर्क टूट गया है। तहसीलदार शिखर मिश्रा ने बताया कि नदी के जलस्तर बढ़ने की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को दी जा रही है।
चंबल नदी से छोड़े जा रहे पानी के कारण उटंगन नदी में जलस्तर बढ़ गया है, जिससे फतेहाबाद और बाह तहसील के ग्रामीण इलाकों की राह बंद हो गई है। टोडा पुल डूब जाने से फतेहाबाद तहसील के लगभग 24 और बाह तहसील के करीब 36 गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
ग्रामीणों को अब पिनाहट होते हुए लगभग 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ रहा है। प्रभावित गांवों में फतेहाबाद तहसील के गढ़ी उदयराज, सारंगपुर, कुतुकपुर गोला, भीकनपुर, शैदपुर, गढ़ी कूमरा, बिहारी, जवाहरपुर, नागर, भदौरा, पथरकोट, किशन की पोखरिया और लालपुरा शामिल हैं।
बाह तहसील के टोडा, शामपुर, सीयपुरा, मनोना, औंध, बसई, शैहा, पापरीनागर, पलोखरा, करकौली, महागोली, उमेदीपुरा, गढ़ का पुरा, जगतूपुरा, नांद का पुरा, प्रजापुरा, बरेंडा, डगौरा, कछियारा, मंसूखपुरा, बड़ागांव, तासौड़, रेहा और कयेडी समेत कई गांवों का संपर्क बाधित हुआ है।
नदी के उफान का असर किसानों की मेहनत पर भी पड़ा है। आसपास के गांवों के खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब गई है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ता रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है।
रोजमर्रा के काम, बाजार, स्कूल और जरूरी सेवाओं के लिए आवागमन में दिक्कतें बढ़ गई हैं। जिन लोगों का पुल के रास्ते फतेहाबाद और बाह क्षेत्र से सीधा संपर्क था, उन्हें अब पिनाहट होकर जाना पड़ रहा है। इससे करीब 30 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है।
दो दिन पहले चंबल नदी का जलस्तर आठ मीटर बढ़ा था, जो बाद में घटकर 120 मीटर पर पहुंच गया है। खतरे के निशान 130 मीटर से यह जलस्तर 10 मीटर नीचे है। सोमवार को नदी के बहाव की गति धीमी होने से जलस्तर गिरने की संभावना जताई जा रही है।
तहसीलदार शिखर मिश्रा ने बताया कि उटंगन नदी के आसपास के क्षेत्रों में तैनात लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं कि नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को दें।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही लगातार हुई बारिश से करूला और गांगन नदियों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। कांठ के सिरसा और मथाना के बीच करूला नदी पर बना रपटा पुल भी पानी में डूब गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर छजलैट-इसमालपुर के बीच करूला नदी के रपटा पुल और गांगन नदी के मल्हपुर खैया में रपटा पुल पर बेरिकेडिंग कर आवागमन रोक दिया है। क्षेत्र के लोगों से अपील की गई है कि वे इन पुलों के ऊपर बह रहे पानी से होकर न निकलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- उटंगन नदी में पुल डूबने से किस क्षेत्र के किसान प्रभावित हुए?
- फसलें पानी में डूबने से आसपास के गांवों के किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।
- जलस्तर बढ़ने की स्थिति में कौन से अधिकारी सतर्क हैं?
- तहसीलदार शिखर मिश्रा ने लेखपालों को जलस्तर बढ़ने की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम को देने के निर्देश दिए हैं।
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