सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शन के केस रद्द किए, BCI चेयरमैन विवाद जारी
सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शन में छात्रों के खिलाफ दर्ज केस रद्द किए और BCI चेयरमैन के कार्यकाल पर सुनवाई की
सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी प्राथमिक केस रद्द कर दिए हैं और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि नीट प्रश्नपत्र लीक से प्रभावित परिवारों को तीन महीने में मुआवजा दिया जाए। वहीं, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विवाद चल रहा है, जहां कार्यकाल की अवधि और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए गए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी प्राथमिक केस रद्द कर दिए हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि नीट प्रश्नपत्र लीक से प्रभावित परिवारों को तीन महीने में मुआवजा दिया जाए। वहीं, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में विवाद जारी है।
नीट प्रदर्शन के केस रद्द
देशभर में 20 से 25 जुलाई के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिक केस सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि नीट प्रश्नपत्र लीक के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही पूरे देश के लिए एक नीति बनाने को कहा गया।
केंद्र सरकार की गुजारिश मानते हुए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को उन 2873 लोगों के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दी, जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है। कॉजपा के सह-संयोजक सौरव दास ने कोर्ट के सामने बयान दिया, जबकि संस्थापक अभिजीत दीपके ने फैसले का स्वागत किया।
BCI चेयरमैन के कार्यकाल पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने BCI के चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के कार्यकाल से जुड़े नियमों और नोटिफिकेशन पर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि BCI बॉडी का पुनर्गठन होने दिया जाए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में एक नोटिफिकेशन में तीन साल के कार्यकाल का उल्लेख था, जबकि बाद में इसे पांच साल तक बढ़ाने का फैसला लिया गया। वकील सीयू सिंह ने कहा कि यह प्रक्रिया हमेशा निर्विरोध होती है और कोर्ट को इसे देखना चाहिए।
जस्टिस बागची ने सुझाव दिया कि पांच साल के कार्यकाल जैसा कोई नियम बनाया जा सकता है ताकि कोई सदस्य लगातार दो बार से अधिक पद पर न रहे। उन्होंने बताया कि स्टेट बार काउंसिल के चुनाव हो चुके हैं और वे अपने प्रतिनिधि चुनेंगे, जिसके बाद प्रतिनिधि आगे चुनाव करेंगे।
शोभा गुप्ता ने कहा कि BCI चेयरमैन पद पर बने रहेंगे। वकील दीवान ने बताया कि अभी कोई भी पद पर नहीं है और मूल मुद्दा वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन का था, जिसका इस्तेमाल मामले को लंबा खींचने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब यह प्रावधान लाया गया था, तब इसका उद्देश्य अच्छा था, लेकिन अब इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है।
सुनवाई में काउंसिल के सदस्यों के 5-स्टार होटलों में ठहरने का मुद्दा भी उठाया गया। कोर्ट ने BCI की ओर से आश्वासन लिया कि किसी भी पॉलिसी फैसले में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को शामिल किया जाएगा।
आगे की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर को इन मामलों की अगली सुनवाई निर्धारित की है। कोर्ट ने नई स्टेट बार काउंसिलों के नोटिफिकेशन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं ताकि वे तय समय में अपने प्रतिनिधि चुन सकें। इससे जल्द से जल्द नई चुनी हुई BCI का गठन हो सकेगा।
प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी
जेपी नड्डा, मंत्री
9 जनवरी के आदेश को पढ़ा जाए.
सूर्यकांत, प्रधान न्यायाधीश
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