सैम ऑल्टमैन ने डेटा सेंटरों के विरोध पर ChatGPT के पानी खर्च का तर्क दिया
सैम ऑल्टमैन ने बताया कि एक बादाम उगाने में जितना पानी लगता है, उतना ChatGPT से पूछे गए सवालों में खर्च होता है
सैम ऑल्टमैन ने कहा कि ChatGPT के संचालन में पानी की खपत एक बादाम उगाने के बराबर है, जो तकनीकी क्षेत्र में पानी उपयोग के विवाद के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया तर्क है। मोना दीक्षित ने तकनीक के प्रबंधन और उसके अंतिम उद्देश्य - जीवन को सरल और बेहतर बनाने पर प्रकाश डाला।
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डेटा सेंटरों के विरोध को लेकर सैम ऑल्टमैन ने ChatGPT के पानी उपयोग को लेकर तर्क दिया है। उन्होंने कहा कि एक बादाम उगाने में जितना पानी लगता है, उतना ही ChatGPT से पूछे गए 38 हजार सवालों के जवाब देने में खर्च होता है। यह बयान तकनीकी क्षेत्र में पानी के उपयोग को लेकर जारी विवाद में आया है।
सैम ऑल्टमैन ने डेटा सेंटरों के विरोध में कहा कि ChatGPT के संचालन में पानी की खपत एक बादाम उगाने के बराबर है। उन्होंने यह तर्क दिया कि तकनीक का उपयोग जीवन को सरल बनाने के लिए होता है और इसके लिए संसाधनों का सही प्रबंधन जरूरी है।
मोना दीक्षित, जो टेक्नोलॉजी और गैजेट्स की अनुभवी पत्रकार हैं, ने बताया कि उन्होंने पिछले 9 वर्षों से टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काम किया है। मोना ने कहा कि तकनीक का असली मापदंड उसके स्पेसिफिकेशन्स नहीं, बल्कि यूजर एक्सपीरियंस होता है।
मोना दीक्षित ने यह भी बताया कि उनका असली हुनर जटिल तकनीकी शब्दावली को आसान भाषा में बदलना है ताकि सामान्य पाठक भी तकनीक का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि तकनीक का अंतिम उद्देश्य जीवन को सरल और बेहतर बनाना है।
मोना ने बैचलर ऑफ साइंस के बाद आईएमएस नोएडा से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की है। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ने से पहले वह प्रमुख टेक्नोलॉजी वेबसाइटों में काम कर चुकी हैं।
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