सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद के अवैध हिस्से का ध्वस्तीकरण
सरकारी जमीन पर बने मस्जिद के हिस्से को भारी पुलिस फोर्स के बीच गिराया गया
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बने मस्जिद के अवैध हिस्से को 5 सितंबर को अदालत के आदेश पर ध्वस्त किया गया। प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी करते हुए कार्रवाई की और सांसद इमरान मसूद ने शांति बनाए रखने का आह्वान किया। मस्जिद पक्ष ने वक्फ संपत्ति होने का दावा करते हुए अदालत में अपनी याचिका दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
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सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बने मस्जिद के एक हिस्से को 5 सितंबर को ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और सांसद इमरान मसूद ने शांति बनाए रखने की अपील की।
प्रशासन ने मस्जिद के अवैध हिस्से को गिराने के लिए सुबह से बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। इसके पहले रात में मस्जिद को सील कर दिया गया था। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में 10 से अधिक थानों की पुलिस और पीएसी तैनात रही। सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए और इलाके में हाई अलर्ट जैसा माहौल बना रहा।
यह कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट अदालत के 16 जुलाई 2026 के आदेश और जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत द्वारा उस आदेश को बरकरार रखने के बाद की गई। अदालत ने विवादित जमीन को सरकारी भूमि माना है। मस्जिद पक्ष की याचिका को जिला अदालत ने खारिज कर दिया था।
कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट में एडीएम प्रशासन संतोष बहादुर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह, एसपी सिटी व्योम बिंदल और सीओ द्वितीय मनोज यादव समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने संभावित विरोध और नाराजगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी।
मस्जिद पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है और इसे वक्फ संपत्ति माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ संपत्ति से जुड़े विवाद की सुनवाई का अधिकार सुन्नी वक्फ सेंट्रल बोर्ड, लखनऊ को है।
मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चा बनी रही।
मुस्लिम पक्ष इस मामले को लेकर हाई कोर्ट जाएगा
इमरान मसूद, सांसद
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