सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद पर बुलडोजर, भारी पुलिस तैनाती
जिला अदालत ने अवैध अधिभोग माना, सांसद इमरान मसूद ने शांति की अपील की
सहारनपुर। सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। शुक्रवार को भारी पुलिस बल के बीच मस्जिद के गेट पर ताला लगाकर परिसर की आवाजाही बंद कर दी गई। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सोशल मीडिया पर शांति बनाए रखने की अपील की।
कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को लेकर विवाद गहराया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने पिछले महीने मस्जिद को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। मुस्लिम पक्ष ने जिला एवं सत्र न्यायालय में इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की, जिस पर कोर्ट ने स्टे दिया था। शुक्रवार को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के सभी गेट बंद कर दिए गए और सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। मौके पर कई थानों की पुलिस और पीएसी मौजूद रही। प्रशासनिक अधिकारी एडीएम संतोष बहादुर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह, एसपी सिटी व्योम बिंदल और सीओ द्वितीय मनोज यादव भी मौजूद थे। मस्जिद के गेट पर ताला लगाकर परिसर में किसी को प्रवेश नहीं दिया गया।
नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी भूमि पर मस्जिद के निर्माण को अवैध अधिभोग माना। अदालत ने मस्जिद को हटाने, बेदखली और 6 करोड़ से अधिक की क्षतिपूर्ति का आदेश दिया था। मस्जिद पक्ष ने 22 जुलाई 2026 को इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन 24 जुलाई को कोर्ट ने स्टे हटा लिया।
बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मस्जिद को अवैध बताते हुए शिकायत की थी कि मस्जिद का उपयोग धार्मिक और व्यवसायिक दोनों रूपों में हो रहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि मस्जिद के कमरे बाहरी लोगों को दिए जाते थे, जो कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा के लिए खतरा था।
मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
अदालत का फैसला
जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा था। अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर की खसरा संख्या-539 को सरकारी भूमि माना और मस्जिद के निर्माण को अवैध अधिभोग करार दिया। दोनों पक्षों ने भूमि के स्वामित्व, पुराने राजस्व अभिलेखों, वक्फ संपत्ति के दावे और 1991 के वर्शिप एक्ट को लेकर अपनी दलीलें अदालत के सामने रखीं। अदालत ने मस्जिद को हटाने, बेदखली और क्षतिपूर्ति का आदेश दिया।
मस्जिद पक्ष ने इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने स्टे हटा दिया। इसके बाद प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया शुरू की।
सुरक्षा व्यवस्था
ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। 10 से अधिक थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी तैनात रही। कलेक्ट्रेट के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्र में पुलिस की निगरानी लगातार बनी रही।
इस कार्रवाई के कारण पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जैसा माहौल बना रहा।
मुस्लिम पक्ष इस मामले को लेकर हाई कोर्ट जाएगा
इमरान मसूद, सांसद
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