भीनमाल में 600 साल पुराने वराहश्याम मंदिर में धार्मिक आयोजन
आज से शुरू होगी भव्य शोभायात्रा, मंदिर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया
भीनमाल के 600 साल पुराने वराहश्याम मंदिर में धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं, जिसमें शाम को शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। यह मंदिर भगवान वराह श्याम की आठ फीट लंबी प्रतिमा के लिए जाना जाता है और यहां विभिन्न मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर में गणेश चतुर्थी और देवझूलनी एकादशी पर भी मेले का आयोजन होता है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
जालोर। भीनमाल के वराहश्याम मंदिर में आज 600 वर्ष पुरानी विरासत के साथ जयंती मनाई जाएगी। मंदिर परिसर में कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे और शाम को शहर के मुख्य मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। मंदिर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है।
वराहश्याम मंदिर देश के गिने-चुने प्राचीन मंदिरों में से एक है। मंदिर में आठ फीट लंबी मुख्य प्रतिमा स्थापित है, जिसमें भगवान वराह श्याम दाएं भुजा में मेदिनी (लक्ष्मी) को धारण किए हुए हैं। इसके पास इंद्राणी और नारद की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। मंदिर परिसर में कई छोटी-छोटी मूर्तियां भी हैं जो दुर्लभ मानी जाती हैं।
मंदिर की दीवारों पर शेषशायी विष्णु, चक्रधारी विष्णु और यक्ष देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, हालांकि मुख्य प्रतिमा के बारे में कोई स्पष्ट शिलालेख मौजूद नहीं है।
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में वराह अवतार तीसरा है, जो भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को अवतरित हुआ था। उस समय पृथ्वी रसातल में डूब चुकी थी, तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर पृथ्वी को समुद्र से अपने दांतों पर धारण कर बाहर निकाला था। इसी दौरान भगवान वराह श्याम ने हिरण्याक्ष का वध किया था।
आज से मंदिर में कई धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो रही है। साथ ही शहर में विभिन्न शोभायात्राएं भी निकाली जाएंगी। गणेश चतुर्थी और देवझूलनी एकादशी पर विशाल मेले का आयोजन भी इसी मंदिर से किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- वराह अवतार कब भगवान विष्णु ने लिया था?
- भगवान विष्णु ने वराह अवतार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को लिया था।
- वराहश्याम मंदिर की मुख्य प्रतिमा किस विशिष्टता के लिए प्रसिद्ध है?
- मुख्य प्रतिमा में भगवान वराह श्याम दाएं भुजा में मेदिनी (लक्ष्मी) को धारण किए हुए हैं।
- मंदिर परिसर में और कौन-कौन सी मूर्तियां हैं?
- मंदिर की दीवारों पर शेषशायी विष्णु, चक्रधारी विष्णु और यक्ष देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद




Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.