राजसमंद की 2 खबरें: राजसमंद में पर्युषण पर्व पर धर्मसभा में आत्मज्ञान का संदेश
नाथद्वारा में हाथों से बनी इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा
राजसमंद में पर्युषण पर्व के दौरान धर्मसभा में आत्मज्ञान और जीवन के सही उपयोग का संदेश दिया गया। नाथद्वारा के श्री बजरंग मित्रमंडल ने मिट्टी से इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित किया।
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राजसमंद। राजसमंद ज़िले की ताज़ा खबरें एक जगह — राजसमंद में पर्युषण पर्व पर धर्मसभा में आत्मज्ञान का संदेश; नाथद्वारा में हाथों से बनी इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा.
राजसमंद में पर्युषण पर्व पर धर्मसभा में आत्मज्ञान का संदेश
राजसमंद के कुंवारियां में आठ दिवसीय पर्युषण पर्व के दौरान धर्मसभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। स्वाध्यायी अंबालाल तातेड, महावीर धोखा और पुखराज नाहर ने प्रवचन देकर आत्मा से महात्मा और परमात्मा बनने का सफर संभव बताया।
धर्मसभा में स्वाध्यायी अंबालाल तातेड, महावीर धोखा और पुखराज नाहर ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के अंदर अनंत ज्ञान छिपा है, जिसे पहचानकर सही इस्तेमाल करना आवश्यक है। स्वाध्यायी महावीर धोखा ने बताया कि यह कलयुग नहीं, बल्कि करयुग है।
प्रवचनकर्ताओं ने समझाया कि भगवान ने इंसान को जीवन का ऐसा नकद सौदा दिया है, जिसमें एक हाथ से देते हैं और दूसरे हाथ से उसका हिसाब भी लेते हैं। इसलिए इस अनमोल मानव जीवन को बेकार नहीं गंवाना चाहिए। 'कर' का मतलब हाथ भी है और काम करना भी। जैसे किसी से कोई चीज ली या दी जाए तो उसे समय पर लौटाना पड़ता है, वैसे ही इंसान को मिले इस जीवन का मोल तपस्या, त्याग, व्रत और धर्म की आराधना से चुकाना होता है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ ज्ञान हासिल करना काफी नहीं है, बल्कि उसे अपने व्यवहार और जीवन में उतारना ही उसकी असली सार्थकता है। इस प्रकार आत्मा से महात्मा और महात्मा से परमात्मा बनने का सफर हर व्यक्ति के लिए मुमकिन है।
नाथद्वारा में हाथों से बनी इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा
नाथद्वारा के कुम्हारवाड़ा में श्री बजरंग मित्रमंडल ने गणेश चतुर्थी पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मिट्टी से इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाई। करीब एक महीने की मेहनत के बाद मंडल के सदस्यों ने बाजार से मूर्ति खरीदने के बजाय स्वयं प्रतिमा निर्माण की कला सीखी और उसे पूरा किया।
मूर्तिकार मुकेश प्रजापत ने सदस्यों को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने की बारीकियां सिखाईं और अंतिम फिनिशिंग दी। प्रतिमा के आधार में तालाब की चिकनी मिट्टी और बांस का उपयोग किया गया। सजावट में इको फ्रेंडली रंगों का इस्तेमाल किया गया है। मंडल ने प्रतिमा निर्माण में गंगा और यमुना के जल का भी प्रयोग किया। फिनिशिंग के लिए विशेष वैक्स मुंबई से मंगवाया गया।
मंडल के सदस्यों ने बताया कि इस प्रतिमा में उनकी सामूहिक आस्था, श्रम और भक्ति समाहित है। श्री बजरंग मित्रमंडल पिछले 26 वर्षों से गणपति स्थापना की परंपरा निभा रहा है। इस बार प्रतिमा निर्माण के जरिए मंडल ने भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पर्युषण पर्व के दौरान धर्मसभा में कौन-कौन से प्रमुख वक्ता रहे?
- धर्मसभा में स्वाध्यायी अंबालाल तातेड, महावीर धोखा और पुखराज नाहर ने प्रवचन दिए।
- नाथद्वारा में बनने वाली इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा में किन खास तकनीकों का इस्तेमाल किया गया?
- प्रतिमा के आधार में तालाब की चिकनी मिट्टी और बांस का उपयोग किया गया, साथ ही सजावट में इको फ्रेंडली रंगों और गंगा-यमुना के जल का भी प्रयोग किया गया।
- श्री बजरंग मित्रमंडल की गणपति स्थापना की परंपरा कितने वर्षों से जारी है?
- श्री बजरंग मित्रमंडल पिछले 26 वर्षों से गणपति स्थापना की परंपरा निभा रहा है।
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