पंजाब में सरकारी कर्मचारियों ने लंबित डीए व नोटिस के विरोध में हड़ताल की
सरकार ने सामूहिक अवकाश को अवैध बताया, मंत्री अमन अरोड़ा ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी
पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने लंबित महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की मांग को लेकर 8 सितंबर को हड़ताल की। सरकार ने इसे अवैध बताया और कार्रवाई की चेतावनी दी है। कर्मचारी संगठन सरकार से संवाद के जरिए समाधान की बात कर रहे हैं, जबकि विवाद न्यायालय में भी लंबित है।
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पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों ने लंबित महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की मांग को लेकर 8 सितंबर को सामूहिक अवकाश पर रहे। सरकार ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए अवैध हड़ताल करार दिया और कार्रवाई की चेतावनी दी।
पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और भगवंत मान सरकार के बीच टकराव नए मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर जाने की घोषणा की थी, जिसे सरकार ने नियमों के खिलाफ बताया। उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि सार्वजनिक सेवाओं में बाधा पहुंचाने की स्थिति में सरकार कड़े कदम उठाएगी।
कर्मचारी संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। पंजाब संजा मुलाजिम मंच ने पहले ही कहा था कि यदि सरकार 7 सितंबर तक कर्मचारियों के खिलाफ जारी नोटिस वापस नहीं लेती है तो 8 सितंबर को कर्मचारी मास कैजुअल लीव पर जाएंगे। सरकार ने इस कदम को अवैध हड़ताल करार दिया है।
मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति से आम लोगों को परेशानी या जरूरी सरकारी सेवाएं प्रभावित होती हैं तो सरकार कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करेगी। उनकी प्रमुख मांग महंगाई भत्ता यानी डीए का मुद्दा है।
सरकार ने बताया कि 17 जुलाई 2020 के बाद नियुक्त करीब 85 हजार कर्मचारियों के लिए डीए को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया जा चुका है। ये कर्मचारी सातवें वेतन आयोग के केंद्रीय पैटर्न के अनुसार वेतन व्यवस्था में आते हैं। हालांकि, इस फैसले का लाभ 17 जुलाई 2020 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को नहीं मिलेगा, जो कर्मचारी संगठनों के असंतोष की बड़ी वजह है।
कर्मचारियों ने लंबित 18 प्रतिशत डीए समेत अन्य बकाया मांगों को लेकर पहले भी राज्यव्यापी आंदोलन किया है। 27 अगस्त को तीन लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर गए थे। इसके बाद सरकार ने उन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिन्हें कथित तौर पर अनधिकृत अनुपस्थिति में पाया गया।
विवाद का एक बड़ा हिस्सा न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ गया है। डीए और डीआर के बकाये का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित डीए/डीआर भुगतान का निर्देश दिया था। सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और कहा है कि करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाये का इतनी कम अवधि में भुगतान करना राज्य की वित्तीय स्थिति के लिहाज से संभव नहीं है।
अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं कर रही, लेकिन पंजाब के आम नागरिकों को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कर्मचारी संगठनों से राजनीतिक प्रभाव से दूर रहकर उचित मंच पर अपनी मांगें रखने का आग्रह किया।
27 अगस्त को हुई राज्यव्यापी हड़ताल में शामिल सरकारी कर्मचारियों ने अब 8 सितंबर को भी हड़ताल की घोषणा की है। कर्मचारी नेताओं ने सरकार को सात सितंबर तक नोटिस संबंधी पत्र वापस लेने का समय दिया था, जो पूरा नहीं हुआ।
मिली जानकारी के अनुसार, कर्मचारी चंडीगढ़-मोहाली में मोहनजीत पर हुए हमले के विरोध में काले कपड़े पहनकर भूख हड़ताल पर बैठ सकते हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप होने के आसार हैं।
सरकारी सेवाओं में बाधा पहुंचाने की स्थिति में सरकार कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी
अमन अरोड़ा, उद्योग मंत्री
मनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन और अन्य कर्मचारी संगठनों ने लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान करने और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की मांग की थी
खैहरा, कर्मचारी नेता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सरकार ने क्यों 85 हजार कर्मचारियों के लिए डीए बढ़ाया?
- इन कर्मचारियों का वेतन सातवें वेतन आयोग के केंद्रीय पैटर्न के अनुसार आता है, इसलिए उन्हें डीए 42% से बढ़ाकर 60% किया गया।
- सरकारी कर्मचारियों ने 8 सितंबर को किस वजह से अवकाश लिया?
- वे लंबित महंगाई भत्ते के भुगतान और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
- सरकार ने कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की चेतावनी दी है?
- सरकार ने कहा है कि यदि आवश्यक सेवाओं में बाधा आई तो वह कानून के तहत कड़े कदम उठाएगी।
- हड़ताल और डीए भुगतान विवाद का न्यायिक पक्ष क्या है?
- हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लंबित डीए/डीआर भुगतान का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है।
- सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच बातचीत की स्थिति क्या है?
- उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा ने बातचीत से समाधान निकालने की अपील की और कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं कर रही।
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