रीढ़ टूटे NSG कमांडो देशराज ने वोट डाला, 22 साल से बिस्तर पर
जयपुर में व्हीलचेयर से बूथ पहुंचे देशराज ने लोकतंत्र में भागीदारी दिखाई
संसद पर हुए आतंकी हमले में रीढ़ टूटने के बाद 22 साल से बिस्तर पर पड़े NSG कमांडो देशराज ने जयपुर में निकाय चुनाव में वोट डाला। शरीर लकवाग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने बेटे की मदद से लोकतंत्र में भागीदारी की। उनका ये कदम अन्य नागरिकों के लिए प्रेरणा माना जा रहा है।
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संसद पर आतंकी हमले में रीढ़ टूटने के बाद 22 साल से बिस्तर पर पड़े NSG कमांडो देशराज ने शुक्रवार को जयपुर में निकाय चुनाव के लिए वोट डाला। बेटे की गोद में बैठकर व्हीलचेयर तक पहुंचे देशराज ने लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा लेकर प्रेरणा दी।
देशराज के कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह लकवाग्रस्त है। नहाने से लेकर कपड़े पहनने में उन्हें दो घंटे लगे, लेकिन वोट डालने का जुनून कम नहीं हुआ। बेटे ने उन्हें गोद में उठाकर व्हीलचेयर पर बैठाया, तब जाकर दिनचर्या पूरी हुई।
निकाय चुनाव के दौरान झोटवाड़ा के वार्ड 23 के बूथ पर पहुंचे देशराज को पहचानने वाले सम्मान में खड़े हो गए। उन्होंने कहा, 'देश के लिए लड़ा हूं, रीढ़ टूट गई, शरीर को लकवा है, लेकिन हौसला नहीं टूटा। जब जवान बॉर्डर पर लड़ते हैं, तो मैं घर में बैठकर अपना वोट कैसे छोड़ सकता हूं।'
देशराज की पत्नी के निधन के बाद वे अकेलेपन से जूझ रहे हैं, लेकिन लोकसभा, विधानसभा या निकाय चुनाव हो, वोट डालना कभी नहीं भूलते। उनकी हिम्मत और लोकतंत्र में भागीदारी दूसरों के लिए प्रेरणा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- देशराज कैसे मतदान के लिए पहुंचे?
- देशराज को उनके बेटे ने गोद में उठाकर व्हीलचेयर पर बैठाया।
- देशराज को वोट डालने में क्या दिक्कत आई?
- नहाने और कपड़े पहनने में उन्हें दो घंटे लग गए।
- देशराज ने लोकतंत्र को लेकर क्या कहा?
- उन्होंने कहा कि हौसला नहीं टूटा और जवान बॉर्डर पर लड़ते हैं इसलिए वे वोट छोड़ नहीं सकते।
- देशराज की व्यक्तिगत परिस्थितियां क्या हैं?
- उनकी पत्नी का निधन हो चुका है और वे अकेलेपन से जूझ रहे हैं।
- देशराज की भागीदारी का क्या प्रभाव है?
- उनकी हिम्मत और लोकतंत्र में भागीदारी दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई है।
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