जयपुर के कारीगरों ने बनाए विदेशी मेहमानों के लिए खास टेबलवेयर
सिल्वर-प्लेटेड कटलरी और टेबलवेयर में पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक का मेल
ब्रिक्स समिट के लिए जयपुर के कारीगरों ने विदेशी मेहमानों के लिए सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी तैयार की है। इस प्रोजेक्ट में करीब 300 कारीगरों ने चार से पांच महीने तक डिजाइनिंग और उत्पादन का काम किया तथा 60 से 70 अलग-अलग वस्तुएं बनाई गईं। हर व्यंजन के लिए अलग डिजाइन बनाए गए हैं, जो भारतीय और विदेशी व्यंजनों की शैली को दर्शाते हैं।
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ब्रिक्स समिट में विदेशी और विशेष मेहमानों के लिए जयपुर के कारीगरों ने सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी विशेष रूप से तैयार की है। इस प्रोजेक्ट में करीब 300 कारीगरों ने चार से पांच महीने तक डिजाइनिंग और उत्पादन का काम किया। हर व्यंजन के लिए अलग-अलग डिजाइन बनाए गए हैं, जो भारतीय और विदेशी व्यंजनों की शैली को दर्शाते हैं।
डायरेक्टर अंतरा पाबुवाल ने बताया कि इस आयोजन के लिए सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी विशेष रूप से तैयार की गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने में डिजाइनिंग, प्रोटोटाइप और अंतिम उत्पादन सहित चार से पांच महीने लगे। शुरुआत में सीमित उत्पादों की मांग थी, लेकिन बाद में जरूरत के अनुसार कुल 60 से 70 अलग-अलग आइटम बनाए गए।
टीम ने कई ऐसे उत्पाद भी बनाए जो पहले कभी नहीं बनाए गए थे। इनमें एक खास 'शॉल ट्रे' शामिल है, जिसका उपयोग मेहमानों को शॉल या कंबल देने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा एक बड़ा फिंगर बाउल भी डिजाइन किया गया है, जिसका आकार सामान्य फिंगर बाउल से बड़ा है ताकि मेहमान आराम से इसका इस्तेमाल कर सकें।
करीब तीन महीने से अधिक समय तक डिजाइन और विकास पर लगातार काम हुआ। पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक तकनीक से जोड़कर टीम ने इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया। अरुण पाबुवाल ने बताया कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए काम करना केवल उत्पाद बनाना नहीं था, बल्कि हर बार खुद से बेहतर करने की चुनौती थी।
समिट में परोसे जाने वाले हर व्यंजन के लिए टेबलवेयर का डिजाइन अलग रखा गया है। स्वागत पेय से लेकर मुख्य भोजन और अंत में मिठाई तक, हर चरण के लिए विशेष डिजाइन तैयार किए गए हैं। रूसी व्यंजनों के लिए अलग शैली अपनाई गई है, जबकि भारतीय व्यंजनों के लिए भारतीय सौंदर्यबोध को ध्यान में रखा गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ब्रिक्स समिट के लिए टेबलवेयर क्यों खास बनाया गया?
- पर्याप्त और अनूठे टेबलवेयर की जरूरत थी जो भारतीय और विदेशी व्यंजनों के अनुरूप हो।
- शॉल ट्रे का उपयोग किसलिए किया जाएगा?
- मेहमानों को शॉल या कंबल देने के लिए शॉल ट्रे का इस्तेमाल होगा।
- डिजाइनिंग और विकास में किन चुनौतियों का सामना किया गया?
- पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और हर बार खुद को बेहतर बनाना प्रमुख चुनौती थी।
- रूसी और भारतीय व्यंजनों के लिए टेबलवेयर में क्या अंतर है?
- रूसी व्यंजनों के लिए अलग शैली अपनाई गई है जबकि भारतीय व्यंजनों में भारतीय सौंदर्यबोध को ध्यान में रखा गया है।
- कार्य का कौन नेतृत्व कर रहा था?
- डायरेक्टर अंतरा पाबुवाल और अरुण पाबुवाल ने इस प्रोजेक्ट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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