मानसून विदाई से पहले फिर सक्रिय, उत्तर भारत में भारी बारिश के आसार
मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात समेत कई राज्यों में बारिश का दौर तेज, वापसी में देरी
मानसून विदाई से पहले फिर सक्रिय हो गया है, जिससे मध्य और उत्तर भारत के कई भागों में भारी बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग ने बताया कि मानसून की वापसी 17 सितंबर के बाद हो सकती है, जबकि देश में अभी तक कुल बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम है। उत्तर भारत में अगले कुछ दिनों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी।
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मानसून विदाई से पहले फिर सक्रिय हो गया है, जिससे मध्य भारत और उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी है। मौसम विभाग ने बताया कि मानसून की वापसी 17 सितंबर के बाद हो सकती है और अभी तक देश में कुल बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम है।
मौसम विभाग के अनुसार, मानसूनी हवाओं ने पश्चिम से आने वाली शुष्क हवाओं को पीछे धकेल दिया है। मध्य प्रदेश के आसपास बने निम्न दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से गुजरात, राजस्थान और मध्य भारत के बड़े हिस्से में बारिश का दौर फिर तेज हुआ है। इस कारण मानसून की विदाई के लिए जरूरी परिस्थितियां अभी पूरी तरह नहीं बन पाई हैं।
बंगाल की खाड़ी में 20 सितंबर के आसपास एक और मौसमी सिस्टम बनने की संभावना है, जो मानसूनी गतिविधियों को आगे भी बनाए रख सकता है। इसी वजह से इस बार मानसून की वापसी 17 सितंबर से आगे खिसक सकती है। पिछले वर्ष मानसून की वापसी सामान्य तिथि से तीन दिन पहले शुरू हो गई थी।
मौसम विभाग ने बताया कि देश में अभी कुल बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम है, जबकि कुछ राज्यों में कमी 40 से 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ऐसे में सितंबर की बारिश खेती के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गई है। पिछले वर्ष पश्चिमी राजस्थान में 14 सितंबर को मानसून की वापसी शुरू हो गई थी। मौजूदा संकेतों के अनुसार अगले करीब दस दिनों तक मानसून की वापसी की संभावना कम है।
आईएमडी के अनुसार, उत्तर भारत में अगले कुछ दिन मानसून की सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे। हिमाचल प्रदेश से लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के तराई एवं आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर तेज बारिश का खतरा बना रहेगा, हालांकि बारिश पूरे क्षेत्र में समान रूप से नहीं होगी और कई जगह इसका स्वरूप खंडित रह सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में अगले कुछ दिनों में मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की स्थिति नहीं है। स्थानीय परिस्थितियों के साथ मानसूनी हवाओं की सक्रियता बढ़ने पर कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। पंजाब और हरियाणा के पश्चिमी हिस्सों में फिलहाल शुष्क मौसम रहने की संभावना है। अगले सप्ताह हवाओं की दिशा और नमी की स्थिति से उत्तर भारत में मानसून के ठहराव की तस्वीर और साफ होगी।
तीन सप्ताह तक लगातार सूखे के बाद गुजरात में बारिश की वापसी हो सकी है, लेकिन सौराष्ट्र और कच्छ में बारिश की कमी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानसून की वापसी केवल बारिश रुक जाने से तय नहीं होती। किसी क्षेत्र से वापसी के लिए लगातार वर्षा गतिविधि में कमी के साथ निचले वायुमंडल में चक्रवात और नमी में पर्याप्त कमी जैसे संकेत जरूरी होते हैं। अभी देश के कई हिस्सों में बारिश और नमी का प्रभाव बना हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मानसून की वापसी इस बार क्यों लेट हो रही है?
- बंगाल की खाड़ी में 20 सितंबर के आसपास मौसमी सिस्टम बनने की संभावना वापसी को आगे खिसका रही है।
- क्या मानसून की वापसी का मतलब बारिश बंद होना है?
- नहीं, वापसी तब मानी जाती है जब लगातार वर्षा गतिविधि में कमी और नमी में काफी कमी आ जाए।
- उत्तर भारत में बारिश का स्वरूप कैसा रहेगा?
- कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है, लेकिन पूरे क्षेत्र में बारिश समान नहीं होगी और खंडित रहेगी।
- किस क्षेत्र में सूखे के बाद सबसे पहले बारिश वापस आई?
- तीन सप्ताह के सूखे के बाद गुजरात में बारिश की वापसी हुई है।
- दिल्ली-एनसीआर में आगामी दिनों में बारिश की संभावना कितनी है?
- मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं रहेगा, मौसम की सक्रियता बढ़ने पर कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।
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