मायावती ने भतीजों को पार्टी से साइडलाइन किया, भतीजी को कमान देने का संकेत
यूपी, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनाव में युवाओं को 50% टिकट देने की योजना
बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में युवाओं और सर्वसमाज के कर्मठ उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपने दोनों भतीजों को पार्टी में कोई पद नहीं देने की बात कही और भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी की कमान सौंपने का संकेत दिया है। मायावती ने परिवारवाद से मुक्त पार्टी बनाने और नई पीढ़ी के जरिए अंबेडकरवादी राजनीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।
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लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों में सर्वसमाज के कर्मठ, युवा और योग्य चेहरों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने का ऐलान किया है। उन्होंने भतीजों को पार्टी में कोई राजनीतिक पद नहीं देने की बात कही और भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी की कमान सौंपने का संकेत दिया।
मायावती ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों में जेन-जी को 50 प्रतिशत तक टिकट देने की योजना है। उन्होंने पार्टी संगठन में युवाओं और खासकर जनरेशन जेड को करीब 50 प्रतिशत तक भागीदारी देने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही होने की बात कही।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके दोनों भतीजों आकाश और ईशान को पार्टी में कोई राजनीतिक पद नहीं मिलेगा और भविष्य में उनके बच्चों को भी कोई पद नहीं दिया जाएगा। इसके विपरीत, भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी की कमान सौंपने पर विचार किया जा रहा है। दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।
मायावती ने कहा, "अगर मैं महिला नहीं होती, तो भाई को भी साथ नहीं रखती।" उन्होंने बताया कि महिला होने के कारण सुरक्षा और सम्मान के लिए उन्हें अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा। उन्होंने परिवारवाद के खिलाफ कांशीराम के रुख पर कायम रहने का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन और भविष्य में सरकार बनने पर भी किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने की स्थिति में उसके परिवार के अन्य सदस्यों को राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा। इसका मकसद बसपा को परिवारवाद से मुक्त रखना और सर्वसमाज के अधिक से अधिक लोगों को सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के आंदोलन से जोड़ना है।
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों के साथ युवा वर्ग को प्राथमिकता दी जाए, जिसमें महिला और पुरुष दोनों का प्रतिनिधित्व हो। उन्होंने कहा कि पार्टी नई पीढ़ी के जरिए अंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाना चाहती है।
उन्होंने BSP सरकारों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, छात्रावास, ट्रेनिंग सेंटर और पार्क जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी नौकरी, रोजगार, स्कूल, अस्पताल, शहरी और ग्रामीण विकास के साथ युवाओं की जरूरतों पर भी काम किया गया, जिससे मजबूरी में पलायन काफी हद तक रुका।
मायावती ने 2012 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि विरोधी दलों के जातिवादी रवैये के कारण BSP पांचवीं बार उत्तर प्रदेश की सत्ता में नहीं आ सकी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को विरोधी दलों, संगठनों और मीडिया-सोशल मीडिया में चलने वाले प्रोपेगेंडा से सावधान रहने को कहा और पूरे तन-मन-धन से अंबेडकरवादी मिशन में जुटे रहने की अपील की।
उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित किए गए नेताओं को BSP में वापस नहीं लिया जाएगा।
मायावती ने कहा कि इस बार यूपी विधानसभा चुनाव जमीन से ज्यादा मोबाइल पर लड़ा जाएगा, जहां लोग नेताओं के लंबे भाषणों से ज्यादा रील्स, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुद्दों को समझेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मायावती ने पार्टी के लिए किसको प्राथमिकता देने को कहा है?
- उन्होंने सर्वसमाज के कर्मठ, युवा और योग्य व्यक्तियों को उम्मीदवार बनाने पर जोर दिया है।
- दीपिका आनंद की वर्तमान स्थिति क्या है?
- दीपिका आनंद फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।
- बसपा भविष्य में परिवारवाद को लेकर क्या नीति अपनाएगी?
- पार्टी किसी भी व्यक्ति के परिवार के अन्य सदस्यों को राजनीतिक लाभ नहीं देगी, जिससे परिवारवाद से मुक्त रह सके।
- मायावती ने पिछले BSP सरकारों के दौरान क्या विकास बताया?
- उन्होंने स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, ट्रेनिंग सेंटर, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में विस्तार का जिक्र किया।
- बसपा चुनाव प्रचार में इस बार क्या नया तरीके अपनाएगी?
- यूपी चुनाव इस बार जमीन से अधिक मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए लड़ा जाएगा, जहां रील्स और शॉर्ट वीडियो पर जोर होगा।
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