मनोज जरांगे की भूख हड़ताल के नौवें दिन तबीयत बिगड़ी
छत्रपति संभाजीनगर में अनशनरत कार्यकर्ता ने दवा-पानी लेने से किया इनकार
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे की छठी सितंबर से तबीयत बिगड़ी है और वह दवा, पानी तथा मेडिकल जांच से इंकार कर रहे हैं। उन्होंने सरकार को 11 सितंबर तक समय सीमा दी है और मराठा जाति को कुनबी प्रमाण पत्र एवं वैधता प्रमाण पत्र जारी करने की बात कही है। उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों में चिंता है और मराठवाड़ा क्षेत्र में बंद व सड़क जाम की आशंका जताई जा रही है।
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मराठा आरक्षण के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे की छठी सितंबर को छत्रपति संभाजीनगर में तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने दवा, पानी और मेडिकल जांच से साफ इनकार कर दिया है।
सरकारी चिकित्सा टीम ने शनिवार आधी रात से रविवार सुबह के बीच जरांगे के स्वास्थ्य की जांच के दो प्रयास किए, लेकिन उन्होंने इलाज कराने से मना कर दिया।
जरांगे लगातार डॉक्टरों की देखरेख में हैं, पर हर दो घंटे में आने वाली मेडिकल टीम से उन्होंने इलाज लेने से इंकार किया है।
उन्होंने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को 11 सितंबर तक की समय सीमा दी है और मांग की है कि पात्र मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी किया जाए तथा वैधता प्रमाण पत्र प्रदान करने की प्रक्रिया आसान बनाई जाए।
जरांगे ने पत्रकारों से कहा कि राज्य सरकार मराठा आरक्षण के मामले को अटका रही है। इससे पहले 2 सितंबर को सरकारी प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए पानी और तरल पदार्थ लेना स्वीकार किया था।
दवा और पानी लेने से इनकार के बाद समर्थकों में चिंता बढ़ गई है और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में बंद और सड़क जाम की आशंका जताई जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण के लिए क्या मांगे रखी हैं?
- उन्होंने मांग की है कि पात्र मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी किया जाए और वैधता प्रमाण पत्र की प्रक्रिया आसान बनाई जाए।
- मनोज जरांगे ने मेडिकल जांच और इलाज के बारे में क्या रवैया अपनाया है?
- उन्होंने मेडिकल जांच और दवा लेने से लगातार इंकार किया है, भले ही डॉक्टर उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हों।
- जरांगे की भूख हड़ताल का असर क्या हो सकता है?
- समर्थकों में चिंता बढ़ गई है और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में बंद और सड़क जाम की आशंका जताई जा रही है।
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