कानपुर में 5600 करोड़ की साइबर ठगी, बैंक सर्वेयर गिरफ्तार
18 राज्यों के लोगों से ठगी, 77 संदिग्ध बैंक खाते सीज, गिरोह के सदस्य गिरफ्तार
कानपुर पुलिस ने 5600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा करते हुए एक सरकारी बैंक के सर्वेयर सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस ठगी में 18 राज्यों के लोग प्रभावित हुए हैं और 77 संदिग्ध बैंक खातों की जांच जारी है। अभियुक्त फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर लोन दिलाने और हवाला के जरिए रकम का लेनदेन करते थे।
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कानपुर पुलिस ने 5600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में एक बड़े सरकारी बैंक के सर्वेयर को गिरफ्तार किया गया है, जिसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों का लोन दिलाया था। पुलिस ने 18 राज्यों के लोगों से ठगी के आरोप में 77 संदिग्ध बैंक खाते सीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि करीब दस हजार बैंक खातों की जांच में 77 संदिग्ध खाते मिले हैं, जिनमें कुल जमा राशि लगभग 5600 करोड़ रुपये है। इनमें से कुछ खातों से नकदी निकालकर हवाला के जरिए रकम इधर-उधर की गई। तीन खातों में 200 करोड़ से अधिक, छह खातों में 100 करोड़ से अधिक, आठ खातों में 50 से 100 करोड़ और 41 खातों में एक से 50 करोड़ रुपये जमा हैं।
सबसे बड़ा खाता एसके इंटरप्राइजेज का है, जिसमें 295.31 करोड़ रुपये जमा हैं। मोहम्मद अमान नाम के खाते में 279 करोड़ रुपये हैं। हजारों ऐसे खाते भी हैं जिनमें एक से 50 लाख रुपये जमा हैं।
पुलिस ने 19 अगस्त को मोहम्मद शादाब की शिकायत पर ठगी का मुकदमा दर्ज किया था। शादाब ने आरोप लगाया कि शाहजेब वारिस, सलमान और आरिफ ने उनसे 25 लाख रुपये ठग लिए। जांच में 14 साइबर ठगों के नाम सामने आए हैं। शाहजेब को हैदराबाद से पकड़ा गया और कानपुर लाने के बाद सलमान को भी गिरफ्तार किया गया।
गिरोह का एक सदस्य इकलाखा है, जो एक सेवानिवृत्त दारोगा का बेटा है। उसकी और साथी आरिफ की लोकेशन मुंबई में मिली है। इकलाखा ने कानपुर में लीज पर होटल लेकर वहीं से ठगी का नेटवर्क चलाया। वह लोगों से लोन दिलाने के बहाने उनके दस्तावेज लेकर फर्जी फर्में पंजीकृत कराकर बैंक खाते खुलवाता था। उसके पांच खातों में करीब 41 करोड़ रुपये का लेनदेन मिला है।
इकलाखा का ससुर भी दारोगा है, जो पूर्वी जोन के एक थाने में तैनात रह चुका है। उसके बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से वर्ष 2024 में आठ दिन के अंदर 180 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। पूछताछ में इकलाखा ने जीएसटी, शेयर ट्रेडिंग समेत अन्य व्यापार की जानकारी दी।
ठगी के शिकार 18 राज्यों के लोग हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, जम्मू कश्मीर, बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तराखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और हरियाणा शामिल हैं।
इससे पहले साइबर ठगी के दो बड़े मामलों में बैंकों के कर्मियों के नाम सामने आ चुके हैं। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कानपुर पुलिस ने ठगी के मामले में कितने संदिग्ध खातों की पहचान की?
- पुलिस ने लगभग दस हजार खातों की जांच की, जिनमें 77 संदिग्ध बैंक खाते मिले हैं।
- सबसे बड़ा संदिग्ध बैंक खाता किसका है और उसमें कितनी राशि है?
- सबसे बड़ा खाता एसके इंटरप्राइजेज का है, जिसमें 295.31 करोड़ रुपये जमा हैं।
- गिरोह के सदस्य इकलाखा की भूमिका क्या है?
- इकलाखा ने लीज पर कानपुर में होटल लेकर वहां से ठगी नेटवर्क चलाया और फर्जी फर्मों का इस्तेमाल कर बैंक खाते खुलवाए।
- ठगी का मुकदमा कब दर्ज किया गया था और किसकी शिकायत पर?
- मुकदमा 19 अगस्त को मोहम्मद शादाब की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
- पुलिस ने ठगी के मामले में किन शहरों से आरोपितों को गिरफ्तार किया?
- शाहजेब को हैदराबाद से पकड़ा गया और कानपुर लाने के बाद सलमान को भी गिरफ्तार किया गया।
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