जालोर के पातालेश्वर हनुमानजी मंदिर में 800 साल से नहीं बनी छत
कानीवाड़ा गांव में स्थित मंदिर की खासियत है स्वयंभू हनुमानजी की प्रतिमा
जालोर के कानीवाड़ा गांव में लगभग 800 साल पुराना पातालेश्वर हनुमानजी मंदिर है, जहां आज तक छत नहीं बनी है। स्थानीय पुजारी के अनुसार, हनुमानजी की स्वयंभू प्रतिमा पाताल से प्रकट हुई है और छत न बनने को धार्मिक मान्यता से जोड़ा जाता है। मंगलवार और शनिवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
जालोर। जालोर जिले के कानीवाड़ा गांव में पातालेश्वर हनुमानजी का प्राचीन मंदिर है, जो करीब 800 साल पुराना बताया जाता है। स्थानीय पुजारी के अनुसार, मंदिर में बालाजी के ऊपर आज तक छत नहीं बनी है, जबकि कई बार प्रयास किए गए।
मंदिर की खास बात है कि यहां विराजमान हनुमानजी की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह प्रतिमा किसी ने स्थापित नहीं की, बल्कि वे धरती से प्रकट हुए। पुजारी हस्तिमल गर्ग ने बताया कि पूर्वजों से चली आ रही मान्यता के अनुसार पातालेश्वर हनुमानजी पाताल से प्रकट हुए हैं।
पूर्वज मेवाड़ से मारवाड़ की ओर जाते समय मित्र ने उन्हें हनुमानजी दिए थे, जिन्हें जमीन और पाताल दोनों जगह रहने वाला बताया गया। जब वे कानीवाड़ा पहुंचे और रात में रुके, तो वह वस्तु अचानक जमीन में समा गई। खुदाई पर पता चला कि वस्तु नीचे चली गई है, जिससे संकेत मिला कि यहां खुदाई नहीं करनी है।
मंदिर के ऊपर छत न बनने को स्थानीय लोग चमत्कार मानते हैं। पुजारी ने कहा, "बालाजी के ऊपर छत नहीं है, कई बार छत बनाने की कोशिश हुई, लेकिन कोशिश सफल नहीं हुई।" मान्यता है कि स्वयंभू बालाजी बंधन में नहीं रहते, इसलिए आज भी उनके ऊपर खुला आसमान है।
मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष आस्था देखने को मिलती है। इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और कई भक्त पैदल यात्रा करके भी आते हैं। पातालेश्वर हनुमानजी का विशेष श्रृंगार भी इन दिनों किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पातालेश्वर हनुमानजी की प्रतिमा का क्या महत्व है?
- प्रतिमा को किसी ने स्थापित नहीं किया बल्कि यह धरती से प्रकट हुई मानी जाती है, जिससे इसकी पौराणिक महत्ता बढ़ती है।
- मंदिर में छत क्यों नहीं बनी?
- लोक मान्यता के अनुसार स्वयंभू बालाजी बंधन में नहीं रहते और यहां खुदाई करना भी वर्जित माना जाता है।
- मंदिर पर श्रद्धालुओं का विशेष उत्साह कब देखा जाता है?
- मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और विशेष श्रृंगार किया जाता है।
- पातालेश्वर हनुमानजी की मान्यता के पीछे क्या कहानी है?
- पूर्वजों का विश्वास है कि हनुमानजी ने पाताल से प्रकट होकर कानीवाड़ा में रहना शुरू किया था।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद




Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.