आईवीएफ से साहीवाल गाय ने बद्री बछिया को जन्म दिया
पंतनगर विश्वविद्यालय ने ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से नस्ल संरक्षण में सफलता पाई
पंतनगर विश्वविद्यालय और एनडीआरआई करनाल ने ओपीयू-इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक से साहीवाल गाय में बद्री बछिया का जन्म कराया है। यह परियोजना तीन वर्षों से चल रही है और इसका उद्देश्य उत्कृष्ट बद्री गायों की संख्या बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। वैज्ञानिक क्लोनिंग पर भी काम कर रहे हैं ताकि बेहतर आनुवंशिक गुणों वाली गायों का संरक्षण हो सके।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
पंतनगर विश्वविद्यालय और एनडीआरआई करनाल ने ओपीयू-इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक से साहीवाल गाय में बद्री भ्रूण प्रत्यारोपित कर बद्री बछिया के जन्म में सफलता हासिल की है। यह बछिया शुक्रवार को सुबह तीन बजकर 10 मिनट पर जन्मी। परियोजना पर वैज्ञानिक तीन वर्षों से काम कर रहे हैं।
पंतनगर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक डेयरी फार्म की उत्कृष्ट बद्री गायों से ओपीयू तकनीक के माध्यम से अंडाणु लिए गए। इन्हें प्रयोगशाला में परिपक्व करने के बाद उत्तराखंड लाइवस्टाक डेवलपमेंट बोर्ड से प्राप्त उत्कृष्ट बद्री गाय के वीर्य से आईवीएफ कराया गया। सात दिन तक नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में विकसित भ्रूणों को साहीवाल और संकर गायों के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया।
वैज्ञानिकों के अनुसार संकर नस्ल की एक अन्य गाय भी अगले पांच से सात दिनों में बद्री बछड़े को जन्म दे सकती है। परियोजना के तहत अधिक दुग्ध उत्पादन वाली उत्कृष्ट बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम चल रहा है। टीम अब तक तीन-चार चरणों में बद्री गाय के क्लोन भ्रूण तैयार कर चुकी है।
कुलपति डा. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने शैक्षणिक डेयरी फार्म पहुंचकर वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बद्री उत्तराखंड की एकमात्र पंजीकृत गाय की नस्ल है, इसलिए इसका संरक्षण और संवर्धन बेहद महत्वपूर्ण है। ओपीयू-आईवीएफ और क्लोनिंग जैसी तकनीकों से उत्कृष्ट आनुवंशिक गुणों वाली बद्री गायों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इससे भविष्य में पशुपालकों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
अनुसंधान में पशु मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग के डा. ने इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ओपीयू तकनीक क्या है और इसे कैसे इस्तेमाल किया गया?
- ओपीयू तकनीक से उम्मीदवार गायों से अंडाणु लिए जाते हैं और इन्हें प्रयोगशाला में परिपक्व किया जाता है।
- बद्री बछिया का जन्म कैसे हुआ?
- प्रयोगशाला में परिपक्व किए गए अंडाणु को बद्री गाय के वीर्य से आईवीएफ कराया गया और भ्रूण को साहीवाल गाय के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया।
- क्लोनिंग परियोजना का उद्देश्य क्या है?
- अधिक दुग्ध उत्पादन वाली उत्कृष्ट बद्री गायों की संख्या बढ़ाने के लिए क्लोनिंग पर कार्य जारी है।
- इस परियोजना से पशुपालकों को क्या लाभ मिल सकता है?
- यह तकनीक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हुए पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद करेगी।
- अगले दिनों क्या उम्मीद की जा रही है?
- संकर नस्ल की एक अन्य गाय अगले पांच से सात दिनों में बद्री बछड़े को जन्म दे सकती है।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद










Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.