पत्नी के अलग रहने पर पति को देना होगा भरण-पोषण भत्ता
हाई कोर्ट ने पति की अपील खारिज कर पत्नी-बेटी को पांच-पांच हजार रुपये मासिक भत्ता देने का आदेश बरकरार रखा
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि पत्नी उचित कारण से पति से अलग रहती है और उसके पास खुद के भरण-पोषण के साधन नहीं हैं, तो पति भरण-पोषण का भुगतान करेगा। कोर्ट ने पति की अपील खारिज कर पत्नी और बेटी को पांच-पांच हजार रुपए मासिक भत्ता देने का आदेश दिया।
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जागरण संवाददाता। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी उचित कारण से पति से अलग रहती है और उसके पास खुद के भरण-पोषण का साधन नहीं है, तो पति भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। कोर्ट ने पति की अपील खारिज कर पत्नी और बेटी को पांच-पांच हजार रुपये मासिक भत्ता देने का आदेश बरकरार रखा।
जस्टिस अलका सरीन और जस्टिस हरप्रीत कौर की खंडपीठ ने जगजीत सिंह की ओर से दाखिल अपील पर यह फैसला सुनाया। फैमिली कोर्ट ने 15 दिसंबर 2022 को पत्नी और बेटी को 18 सितंबर 2015 से मासिक भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। पत्नी और बेटी को पांच-पांच हजार रुपये प्रतिमाह भत्ता मिलेगा, जो बेटी की शादी तक और पत्नी की पात्रता तक जारी रहेगा।
मामले में पत्नी ने आरोप लगाया कि विवाह के बाद उसे कम दहेज लाने को लेकर प्रताड़ित किया गया और पति शराब व नशीले पदार्थों का सेवन कर मारपीट करता था। विवाद बढ़ने पर पंचायतें हुईं, लेकिन मामला नहीं सुलझा। पत्नी ने बताया कि उसे मारपीट कर बेटी के साथ घर से निकाल दिया गया। पति ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पत्नी ने स्वयं वैवाहिक घर छोड़ा है और वह भरण-पोषण के लिए तैयार है।
हाई कोर्ट ने सुनवाई में पाया कि पत्नी ने बिना कारण वैवाहिक घर नहीं छोड़ा था। पति ने स्वीकार किया कि पत्नी पंचायत के हस्तक्षेप से दो बार उसके साथ रह चुकी थी, जिससे विवाद पहले भी पंचायत तक पहुंच चुका था। कोर्ट ने ध्यान दिया कि पत्नी के पास रहने के लिए मकान नहीं था और उसके पास खुद के भरण-पोषण का कोई साधन या संपत्ति नहीं थी।
हाई कोर्ट ने माना कि पति आर्थिक रूप से सक्षम है जबकि पत्नी और बेटी अपने भरण-पोषण में सक्षम नहीं हैं। इस कारण परिवार न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने पति की अपील खारिज कर भरण-पोषण का आदेश बरकरार रखा।
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