गंगा का जलस्तर घटा, बाढ़ प्रभावितों की परेशानी बरकरार
मामूली गिरावट के बावजूद जलभराव से राहत नहीं, प्रशासन ने बढ़ाई राहत कार्यों की गति
मोहिउद्दीननगर में गंगा और वाया नदियों का जलस्तर घटा है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित करीब चार लाख लोगों की परेशानी बरकरार है। जिला प्रशासन राहत कार्यों में लगा हुआ है और प्रभावितों के लिए सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं, जबकि जलस्तर में कमी की गति धीमी होने के कारण पानी की निकासी में देर हो रही है।
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मोहिउद्दीननगर। मोहिउद्दीननगर में गंगा और वाया नदियों के जलस्तर में पिछले कुछ घंटों से मामूली गिरावट दर्ज हुई है। इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित करीब चार लाख लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है। जिला प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटा हुआ है।
बीते दो सप्ताह से जलभराव से प्रभावित दर्जनों परिवारों की सुध लेने कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा है, स्थानीय लोग बताते हैं। गंगा घाट पर पिछले 12 घंटे में जलस्तर में केवल पांच सेंटीमीटर की गिरावट आई है, जिससे प्रभावित इलाकों में पानी की निकासी धीमी बनी हुई है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को विशेष परेशानी हो रही है।
जलस्तर में गिरावट की रफ्तार इतनी धीमी है कि प्रभावित इलाकों से पानी निकलने में अभी काफी समय लग सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर कम हो रहा है, लेकिन जमीन पर इसका असर फिलहाल कम दिखाई दे रहा है। दियारांचल के कई गांवों में बाढ़ का पानी घरों, सड़कों और खेतों में जमा है, जिससे रोजमर्रा के कामों के लिए नाव या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्रखंड क्षेत्र के दुबहा पंचायत में बाढ़ पीड़ितों के लिए आधे दर्जन से अधिक सामुदायिक किचन संचालित किए जा रहे हैं। यहां प्रभावित परिवारों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। बुधवार तक प्रखंड के पांच सामुदायिक रसोई घरों का संचालन शुरू हो चुका है।
जिला प्रशासन के डीएम रिची पांडेय ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक किचन की गुणवत्ता, भोजन व्यवस्था और स्वच्छता का जायजा लिया। पॉलीथिन वितरण और पशुचारे को लेकर मिली शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय में रखा गया है, जहां चारा, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग की गई है। प्रशासन राहत कार्यों को तेज कर रहा है, लेकिन जलस्तर में गिरावट की धीमी गति से प्रभावितों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम बनी हुई है।
केंद्रीय जल आयोग ने जलस्तर के घटने की प्रवृति का पूर्वानुमान किया है
आदित्य प्रकाश, अभियंता
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की गई है
मनीष कुमार, निदेशक
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या जिला प्रशासन बाढ़ राहत कार्यों में जुटा है?
- जी हां, प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य कर रहा है और डीएम रिची पांडेय ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण भी किया है।
- बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन कैसे मिल रहा है?
- प्रखंड के दुबहा पंचायत में आधे दर्जन से अधिक सामुदायिक किचन हैं, जो प्रभावित परिवारों को नियमित भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।
- बाढ़ से पशुओं की सुरक्षा कैसे की गई है?
- पशुओं को प्राथमिक विद्यालय में रखा गया है जहां चारा, पेयजल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
- जलस्तर में गिरावट का क्या असर हो रहा है?
- जलस्तर कम हो रहा है लेकिन पानी की निकासी धीमी है, जिससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत मिलने में समय लगेगा।
- स्थानीय लोगों की प्रशासन से क्या शिकायतें हैं?
- स्थानीय लोग बताते हैं कि बीते दो सप्ताह से जलभराव प्रभावित परिवारों की सुध लेने अधिकारी नहीं पहुंचे हैं।
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