पूर्व CDS अनिल चौहान ने चीन-पाकिस्तान को दी सुरक्षा चुनौती
चीन के साथ सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच पाकिस्तान को बड़ा खतरा बताया
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद और छद्म युद्ध के माध्यम से भारत के लिए सुरक्षा चुनौती बना हुआ है और साथ ही चीन के साथ सीमा विवाद के कारण तनाव जारी है। उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग की आवश्यकता बताते हुए सीमा पर सतर्कता और स्पष्ट समझौतों पर जोर दिया।
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चीन। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की बीजिंग यात्रा के दौरान पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने चीन और पाकिस्तान को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया।
7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने मक्का में साझा रक्षा समझौता किया था, जिससे पाकिस्तान में जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास आ सकता है और वह कोई गलत कदम उठा सकता है। पूर्व CDS ने कहा, "पाकिस्तान आमने-सामने की सीधी जंग से बचता है और आतंकवाद व छद्म युद्ध का सहारा लेता है।" उन्होंने बताया कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की किराना हिल्स पर अनजाने में एक ड्रोन गिर गया था।
पूर्व सीडीएस ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर साझा परिभाषा न होने और सीमा विवाद न सुलझने के कारण तनाव जारी रहने की बात कही। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखना आवश्यक है क्योंकि वे एशिया की बड़ी ताकतें और अर्थव्यवस्थाएं हैं।
चीन के साथ सीमा विवाद को केवल रिश्तों का बंधक नहीं बनाया जा सकता। पूर्व CDS ने शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन और ब्रिक्स के तहत सहयोग का उदाहरण दिया और कहा कि एशिया का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत और चीन का एक साथ उभरना कैसे आगे बढ़ता है।
उन्होंने भारतीय पड़ोस के कई देशों में अस्थिरता को भी सुरक्षा चुनौती बताया। पूर्व CDS ने कहा कि पाकिस्तान की सोच न्यूक्लियर हथियारों की आड़ में पारंपरिक सैन्य कार्रवाई की गुंजाइश घटाने और आतंकवाद व सीमा-पार गतिविधियों को बढ़ाने की रही है। भारत ने उरी, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए क्रेडिबल डेटरेंस कायम किया है।
पूर्व CDS ने सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए सतर्कता, विश्वसनीय क्षमताएं, स्पष्ट समझौते और उनका पालन जरूरी बताया। उन्होंने संभावित हॉटलाइन शुरू करने और पूर्वोत्तर में कोर कमांडर स्तर की बातचीत को स्वागत योग्य कदम कहा।
उन्होंने आगाह किया कि पाकिस्तान में ऐसे समझौते अति-आत्मविश्वास पैदा कर सकते हैं, इसलिए भारत को पूरी तरह चौकन्ना रहना होगा। केवल आतंकी संगठनों को खत्म करना पर्याप्त नहीं है क्योंकि उनकी सोच, पैसा और सरकारी मदद उन्हें पुनः सक्रिय कर देती है। इसलिए सेना का कड़ा और ताकतवर जवाब ही दुश्मन को रोक सकता है।
पाकिस्तान लंबे समय तक भारत के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती बना रहेगा
अनिल चौहान, पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
भारत और चीन दोनों आपस में सहयोग भी करते हैं और प्रतिस्पर्धा भी
जनरल अनिल चौहान, पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौती के पीछे क्या रणनीति है?
- पाकिस्तान आमने-सामने जंग से बचकर आतंकवाद और छद्म युद्ध का सहारा लेकर भारत की सीमाओं को प्रभावित करता है।
- भारत-चीन संबंधों में सहयोग और प्रतिस्पर्धा कैसे है?
- भारत और चीन दोनों क्षेत्रीय सहयोग जैसे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन और ब्रिक्स में सहभागी हैं, लेकिन साथ ही सीमांत विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी चलते हैं।
- भारत सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
- भारत सीमा पर सतर्कता, विश्वसनीय क्षमताओं और स्पष्ट समझौतों का पालन कर रहा है, साथ ही हॉटलाइन और कोर कमांडर स्तर की बातचीत को बढ़ावा दे रहा है।
- पाकिस्तान के आत्मविश्वास को भारत कैसे देखता है?
- भारत पाकिस्तान में नए समझौतों से पैदा हुए अतिआत्मविश्वास को जोखिम भरा मानता है, इसलिए पूरी तरह चौकन्ना रहने की जरूरत बताता है।
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